आनंदीबेन के बाद विजय रुपानी गुजरात के सीएम बने, उनके साथ 25 नए लोगों ने विभिन्न पदों के लिए शपथ ली। रोडमैप फिलहाल सियासत साधने वाला लग रहा है। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह चुनावी रोडमैप तैयार करने में माहिर समझे जाते हैं। उनके सामने 2017 में दो राज्यों यूपी और गुजरात के विधानसभा चुनावों की चुनौती है। आनंदीबेन के गुजरात के सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद अमित शाह ने गुजरात की जो बीजेपी ब्रिगेड बनाई है, उससे साफ लग रहा है कि पार्टी का ध्यान फिलहाल सूबे में सियायत साधने पर रहेगा।
पाटीदार आंदोलनों से निपटने में कमजोर रही आनंदीबेन को देखते हुए शाह ने ऐसा मंत्रिमंडल तैयार किया है जो पहले के मुकाबले अब चुनौतियों से निपटने में ज्यादा कारगर समझा जा रहा है। वजह साफ है, दल में ओबीसी कैटेगरी के नेता ज्यादा शामिल किए गए हैं। मसलन, जातिगत समीकरण पर काम किया गया है। इसे बीजेपी, मोदी और शाह की मजबूरी भी कह सकते हैं, क्योंकि हाल ही में राज्य में उठे दलित मुद्दे से सरकार की खूब किरकिरी भी हुई है।
ऊना में दलितों की पिटाई और देश में जगह-जगह हुई दलित उत्पीड़न की घटनाओं ने करीब महीने भर बाद पीएम मोदी को भी चुप्पी तोड़ने पर मजबूर किया। वहीं, अन्य दलों के नेता भी यह संदेश फैलाने में सफल लग रहे हैं कि आखिर वोट बैंक साधने के लिए पीएम ने दलितों पर चुप्पी तोड़ ही दी। इन तमाम बातों के चलते गुजरात में तीन बार लगातार सत्ता पर काबिज बीजेपी अपनी सियासी जमीन खोना नहीं चाहती और हर हाल में वोट बैंक पर मजबूत पकड़ चाहती है। शायद इसीलिए सीएम की शपथ के साथ डेप्युटी सीएम की शपथ भी खाई गई।
ओबीसी कार्ड खेलेगी बीजेपी, दलितों के मामले पर हुई है खूब किरकिरी
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सीएम विजय रूपानी को उप मुख्यमंभी नितिन पटेल को साथ लेकर चलना पड़ेगा, इसकी वजह साफ है कि उनका खुद का अनुभव भी कम है, पार्टी में उनको अभी लगभग 20 महीने ही हुए हैं।
वहीं, आनंदीबेन टीम के माने जाने वाले सौरभ पटेल, रमन लाल वोरा, मंगूभाई पटेल और वसूबेन त्रिवेदी जैसे नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है, पिछली सरकार के तीन कैबिनेट और छह राज्य मंत्रियों को भी चलता किया गया है।
सौरभ पटेल की मंत्रिमंडल से छुट्टी चौंकाने वाली है। सौरभ पटेल ऊर्जा मंत्रालय संभाल रहे थे और 2002 से मोदी की जीत से लेकर अब तक मंत्री पद पर रहे। सूबे में ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र को रफ्तार देने में सौरभ पटेल का खासा योगदान रहा।
फिलहाल गुजरात में सरकार चलाने से ज्यादा राजनीति पर ध्यान ज्यादा
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पटेल की छुट्टी की सबसे बड़ी वजह उनके अंबानी परिवार से ताल्लुकात मानी जा रही है, क्योंकि आम आदमी पार्टी ने राज्य के चुनाव में उतरने का मन बना लिया है। एक वजह यह भी हो सकती है कि मोदी केंद्र में उनसे काम लें। पटेल से केंद्र के ऊर्जा और टैक्स संबंधी मामले सुलझाने के लिए कहा जा सकता है। जीएसटी के लिए भी सौरभ पटेल से काम लिया जा सकता है।
इस बार गुजरात में पाटीदार आंदोलनों से निपटने के लिए बीजेपी कोई चूक नहीं करना चाहती है, इसलिए पार्टी संवेदनशील रणनीतियों पर गौर कर रही है।
वहीं, आनंदीबेन सरकार की सरकार के मुकाबले रुपानी की कैबिनेट में ओबीसी चेहरों को दोगुना किया गया है, इससे साफ है कि सियायत में अमित शाह कोई ढील नहीं रखना चाहते हैं। ऊना दलित मामले की चपेट में आए दलित नेता रमनलाल वोहरा को विधानसभा का स्पीकर बनाने पर विचार हो सकता है।