बैठक में पहुंचे योगी आदित्यनाथ
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भारतीय जनता पार्टी की मुख्यमंत्री परिषद की बैठक रविवार को दिल्ली में हुई। इस बैठक में भाजपा शासित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री पहुंचे। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई दिग्गज भाजपा नेता भी शामिल हुए। यह बैठक पार्टी की आगामी रणनीति को लेकर बुलाई गई थी।
बताया जा रहा है कि पीएम मोदी ने दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में बीजेपी सीएम काउंसिल की बैठक में बीजेपी और एनडीए शासित राज्यों के 12 सीएम, 8 डिप्टी सीएम के साथ बातचीत की। भाजपा के मुताबिक, पीएम मोदी ने गति शक्ति, हर घर जल और अन्य जैसी प्रमुख सरकारी योजनाओं के कार्यान्वयन और शत प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने की दिशा में आगे बढ़ने पर जोर दिया। पीएम मोदी ने व्यापार करने में आसानी सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने राज्यों को देश में कारोबारी माहौल को और बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
दरअसल, आगामी दिनो में कई राज्यों में विधानसभा व 2024 में लोकसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सभी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई गई है, जिससे सभी राज्यों में विकास कार्यों का जायजा लिया जा सके।
पीएम मोदी करेंगे समीक्षा
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, बैठक में सीएम योगी आदित्यनाथ, पुष्कर सिंह धामी, हिमंता बिस्वा सरमा, भपेंद्र पटेल व अन्य मुख्यमंत्री शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को अपने-अपने राज्य में विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं की रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है। बैठक के दौरान पीएम मोदी सभी राज्यों में केंद्रीय योजनाओं की समीक्षा कर सकते हैं। इस दौरान वे पार्टी नेताओं को आगामी रणनीति का मंत्र भी देंगे।
स्टालिन ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखा खत
इस बीच तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को खत लिखा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को यूक्रेन से घर वापस आए चिकित्सा विद्यार्थियों को यह सहूलियत देनी चाहिए कि वह घरेलू या विदेशी कॉलेज में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। राज्यों के साथ समन्वय से यूक्रेन से विद्यार्थियों को निकालने के लिए केंद्र द्वारा उठाए गए त्वरित कदमों का जिक्र करते हुए स्टालिन ने कहा कि विद्यार्थियों में निराशा की भावना है कि केंद्र सरकार द्वारा पढ़ाई जारी रखने के संबंध में समान रूप से ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।