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कौन-कौन बना है भाजपा का अध्यक्ष: कितने रहे कार्यकारी प्रमुख, सबसे ज्यादा बार किसके पास रहा पद?

Sun, 14 Dec 2025 09:23 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भाजपा की अब तक की परंपरा को देखा जाए तो पार्टी पहले जिला इकाइयों और फिर राज्य इकाईयों के चुनाव कराती है। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर अध्यक्ष चुना जाता है। यह फैसला अधिकतर एकमत से ही होता है। इसके बाद संघ की सहमति के बाद भाजपा अध्यक्ष का एलान कर दिया जाता है।
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भाजपा अध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को अपने कार्यकारी अध्यक्ष का एलान कर दिया। बिहार सरकार में मंत्री नितिन नबीन को फिलहाल पार्टी ने प्रमुख बनाया है। हालांकि, पार्टी खरमास के बाद पूर्णकालिक अध्यक्ष के नाम की भी घोषणा कर सकती है। इससे पहले जगत प्रकाश नड्डा पार्टी के अध्यक्ष पद पर पांच साल से ज्यादा समय तक रहे। 
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गौरतलब है कि नड्डा का आधिकारिक तौर पर कार्यकाल लोकसभा चुनाव से पहले ही खत्म हो चुका था। लेकिन पार्टी ने सर्वसम्मति से चुनाव के मद्देनजर उनका कार्यकाल बढ़ा दिया। इसके साथ ही बीते एक साल से नए भाजपा अध्यक्ष की खोज जारी है। हाल ही में भाजपा ने अपने कुछ नए प्रदेशाध्यक्षों का एलान भी किया था। इसके बाद से ही अटकलें हैं कि भाजपा अगले महीने तक नए अध्यक्ष का एलान कर सकती है।

भाजपा की अब तक की परंपरा को देखा जाए तो पार्टी पहले जिला इकाईयों और फिर राज्य इकाईयों के चुनाव कराती है। इसके बाद राष्ट्रीय स्तर पर अध्यक्ष चुना जाता है। यह फैसला अधिकतर एकमत से ही होता है। इसके बाद संघ की सहमति के बाद भाजपा अध्यक्ष का एलान कर दिया जाता है।
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भाजपा अध्यक्षों और उनके चुनाव का इतिहास क्या?
  • भाजपा के अस्तित्व में आने के साथ ही इसके संस्थापक अटल बिहारी वाजपेयी पार्टी के पहले अध्यक्ष बने थे। 1980 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं रहा और उसे सिर्फ दो ही सीटें मिलीं।
  • हालांकि, भाजपा के लगातार बढ़ते जनाधार की वजह से 1985 में भाजपा को काडर आधारित पार्टी घोषित कर दिया गया और इसका नया अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी को बनाया गया।
  • लालकृष्ण आडवाणी ने इसके बाद भाजपा की दिशा हिंदुत्व और रामजन्मभूमि आंदोलन की तरफ मोड़ दी। 1989 की भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में इस संबंध में प्रस्ताव भी पारित किया गया।
  • लालकृष्ण आडवाणी ने लगातार दो बार भाजपा का अध्यक्ष पद संभाला। इसके बाद भाजपा के अधिकतर प्रमुख एकमत से जरूर चुने गए, लेकिन सभी ने एक ही कार्यकाल संभाला।

भाजपा में लंबा चला अध्यक्ष बदलने का दौर
  • इनमें आडवाणी के बाद भाजपा अध्यक्ष बने मुरली मनोहर जोशी, जना कृष्णमूर्ति, एम. वेंकैया नायडू, बंगारू लक्ष्मण, कुशाभाऊ ठाकरे जैसे नेता शामिल रहे, जो कि आरएसएस से गहराई से जुड़े थे और राजनीतिक तौर पर बाद में भाजपा में उभरे। इनमें से सिर्फ मुरली मनोहर जोशी और कुशाभाऊ ठाकरे ने ही अपना कार्यकाल पूरा किया।
  • खास बात यह रही कि बंगारू लक्ष्मण के भ्रष्टाचार से जुड़े एक मामले में उलझने के बाद पार्टी ने पहली बार जना कृष्णमूर्ति को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया। उन्हें कुछ ही दिन में पूर्ण अध्यक्ष नियुक्त कर दिया गया।
  • 2003 में भाजपा ने अपने संविधान में बदलाव किया और अध्यक्ष पद के लिए लगातार दो बार की सीमा तय कर दी। इसमें साफ किया गया कि कोई भी सदस्य एक बार से ज्यादा अध्यक्ष रह सकता है, लेकिन लगातार नहीं।
  • इसके चलते जब 2004 में भाजपा की लोकसभा चुनाव में हार हुई तो वेंकैया नायडू ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए भाजपा अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। आखिरकार बदले हुए नियम के तहत आडवाणी फिर से पार्टी के अध्यक्ष बने।

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भाजपा ने आडवाणी के नेतृत्व में लड़ा था 2009 का आम चुनाव
  • हालांकि, आडवाणी का तीसरा कार्यकाल लंबा नहीं चला और पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना को धर्मनिरपेक्ष बताने के बाद उन्हें भाजपा अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए कहा गया। उनके बाद राजनाथ सिंह भाजपा अध्यक्ष बने।
  • 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद राजनाथ सिंह ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया। यह पद इसके बाद नितिन गडकरी को गया। संगठन में उनके मजबूत प्रदर्शन को देखते हुए आरएसएस ने भाजपा के संविधान में बदलाव कराया और लगातार अध्यक्ष रहने के नियम को फिर लागू कर दिया।
  • गडकरी को अपने दूसरे कार्यकाल में ही इस्तीफा देना पड़ा। दरअसल, उनसे जुड़े पूर्ति समूह पर आयकर विभाग के छापों की वजह से गडकरी ने आगे अध्यक्ष पद पर न रहने का फैसला किया। इसके बाद भाजपा प्रमुख का पद फिर राजनाथ सिंह को मिला।

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  • राजनाथ सिंह के नेतृत्व में ही 2014 में भाजपा को लोकसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल करने में सफलता मिली। लेकिन राजनाथ सिंह केंद्रीय गृह मंत्रालय सौंपा गया, जिसकी वजह से उन्होंने भाजपा अध्यक्ष पद छोड़ दिया।
  • 2014 में अमित शाह भाजपा अध्यक्ष बने और पार्टी संगठन को मजबूती देते हुए लगातार दो बार पार्टी प्रमुख रहे। 2019 में जब अमित शाह का कार्यकाल खत्म हुआ तो भाजपा ने जेपी नड्डा को पहले कार्यकारी अध्यक्ष और फिर पूर्ण अध्यक्ष बनाया। 2024 में उनका कार्यकाल खत्म हो चुका है और मौजूदा समय में नड्डा एक साल के एक्सटेंशन पर रहे। 
  • अब भाजपा ने नितिन नबीन को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है। माना जा रहा है कि पार्टी खरमास के बाद यानी 14 जनवरी के बाद पूर्ण अध्यक्ष का भी एलान कर सकती है। 
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