ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा 14 जनवरी से शुभ दिन शुरू होने के बाद ही नए पूर्णकालिक भाजपा अध्यक्ष का एलान कर सकती है। चूंकि अभी अध्यक्ष के एलान के ठीक बाद खरमास पड़ना था, इसलिए उसने फिलहाल कार्यकारी अध्यक्ष का एलान किया है। इससे जेपी नड्डा भी अपने पद से स्वतंत्र होकर पश्चिम बंगाल व अन्य राज्यों के लिए चुनाव की रणनीति तैयार करने में जुड़ सकते हैं।
पहले भाजपा ने कब खरमास की वजह से रोका अपना अहम कार्य?
ऐसा नहीं है कि भाजपा ने खरमास की वजह से पहली बार कोई बड़ा एलान टाला हो। इससे पहले लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव और जिलाध्यक्ष से लेकर अन्य चुनावों में भी पार्टी ने ज्योतिषीय गणनाओं का ख्याल रखा है। 2017 में भाजपा ने विधानसभा चुनाव के लिए सूची तैयार कर ली थी, हालांकि इसका एलान खरमास तक के लिए रोक दिया गया था। इसके बाद शुभ मूहुर्त देखकर पार्टी ने 16 जनवरी को अपनी लिस्ट निकाली थी।
कुछ ऐसा ही भाजपा ने 2023 में लोकसभा चुनाव के दौरान किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ने पार्टी के प्रत्याशियों को लेकर मंथन शुरू किया था, हालांकि लिस्ट फाइनल होने में कुछ समय लिया गया और चुनावों की तैयारियां खरमास के बाद ही आगे बढ़ाई गईं।
कौन-कौन बना है भाजपा का अध्यक्ष: कितने रहे कार्यकारी प्रमुख, सबसे ज्यादा बार किसके पास रहा पद?
भाजपा में पहले कब कार्यकारी अध्यक्ष बने पूर्णकालिक अध्यक्ष?
भाजपा के अब तक के इतिहास को देखा जाए तो सामने आता है कि अब तक पार्टी 11 चेहरों को अध्यक्ष बना चुकी है। हालांकि, इनमें से सिर्फ दो ही चेहरे ऐसे हैं, जिन्हें पहले कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर और फिर पूर्णकालिक अध्यक्ष के तौर पर नियुक्ति मिली। यानी भाजपा ने जिन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया, उन्हें बाद में पूर्ण अध्यक्ष भी बनाया। ऐसे में यह भी संकेत हैं कि नितिन नबीन को खरमास के बाद पूर्ण अध्यक्ष का पद सौंपा जा सकता है।