उत्तर प्रदेश में पिछड़ी जातियों का अलग-अलग जातियों में बंटवारा मामले में आई सामाजिक न्याय रिपोर्ट को ले कर भाजपा जल्दबाजी में नहीं है। दरअसल समिति की यादव और कुर्मी बिरादरी को राजनीतिक रसूख वाला बताते हुए 27 फीसदी आरक्षण में से महज 7 फीसदी आरक्षण देने की सिफरिश ने पार्टी नेतृत्व को उलझन में डाल दिया है। ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस रिपोर्ट को लागू करने से पहले राज्य विधानसभा का सत्र पूरा हो जाने के बाद व्यापक विमर्श की योजना बनाई है।
दरअसल भाजपा भी चाहती है कि यूपी में पुराना प्रदर्शन दुहराने के लिए इस रिपोर्ट को मास्टर स्ट्रोक के तौर पर आजमाया जाए। पार्टी की सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी ने तो रिपोर्ट लागू न होने पर आंदोलन की चेतावनी है। मगर पार्टी को डर है कि इस रिपोर्ट की सिफारिशों को अक्षरश: मान लिया गया तो राज्य की 34 और लोकसभा की 8 सीटों पर सीधा प्रभव रखने वाली कुर्मी बिरादरी नाराज हो जाएगी। बीते लोकसभा और विधानसभा चुनावों में इस बिरादरी ने भाजपा और उसकी सहयोगी अपना दल को वोट दिया था। सपा इसी बिरादरी का प्रदेश अध्यक्ष और बेनी प्रसाद वर्मा की घर वापसी करा कर इस बिरादरी पर पहले ही डोरे डाल रही है।
इस मामले में अपना दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल और भाजपा के इसी बिरादारी के केंद्रीय मंत्री ने रिपोर्ट में कई खामियां गिना कर अपना विरोध जताया। पटेल का कहना था कि अपना दल ने कभी पिछड़ों केआरक्षण का विरोध नहीं किया। मगर सवाल है कि बिना जातीय जनगणना और हवाई आंकड़ों के प्रस्तावित बंटवारे के तरीके पर हमारा विरोध है।
जातिगत जनगणना कीजिये और जातियों को आबादी के अनुपात में आरक्षण दे दीजिये, हम इसका विरोध नहीं करेंगे। उक्त केंद्रीय मंत्री का कहना था कि इस रिपोर्ट पर फिलहाल पार्टी स्तर पर कोई चर्चा नहीं हुई है। पार्टी अध्यक्ष शाह सत्र के बाद पार्टी की राज्य इकाई, राज्य सरकार और सहयोगी दलों के साथ व्यापक विमर्श केबाद ही रोडमैप तैयार करेंगे।