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BJP: पीएम मोदी का इशारा, राजस्थान में खत्म होगा 'रानी का राज'

अमित शर्मा
Updated Tue, 12 Dec 2023 01:02 PM IST

सार

राजस्थान में भी उन्हीं सामाजिक समीकरणों को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री का फॉर्मूला अपनाया जाएगा, जैसा छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश में किया गया है। राज्य में ओबीसी-जाट-राजपूत समीकरणों को साधने की कोशिश की जा सकती है...
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BJP: Vasundhara Raje - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht


राजस्थान में भी उन्हीं सामाजिक समीकरणों को आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री का फॉर्मूला अपनाया जाएगा, जैसा छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश में किया गया है। राज्य में ओबीसी-जाट-राजपूत समीकरणों को साधने की कोशिश की जा सकती है। इस समय राजस्थान में भाजपा ने सीपी जोशी को अध्यक्ष बनाकर ब्राह्मण समीकरण को साथ रखा है। अब सत्ता में शेष जातियों को प्रतिनिधित्व देकर उन्हें अपने साथ लाने की कोशिश की जा सकती है।    

वसुंधरा राजे सिंधिया ने राजस्थान में जीत के बाद अपने आवास पर 60 के करीब विधायकों से मुलाकात कर मुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी ठोंकने का काम किया था। बाद में यह चर्चा भी सामने आई कि उनके कुछ करीबियों ने भाजपा के कुछ विधायकों को जबरन अपने खेमे में रहने के लिए बाध्य किया। यह मामला वसुंधरा के खिलाफ गया है। शिवराज सिंह चौहान की तरह वसुंधरा राजे की सारी कोशिशें फिलहाल असफल साबित हो सकती हैं और पार्टी नेतृत्व किसी नए चेहरे को अवसर दे सकता है।

किन समीकरणों को साधने की हो सकती है कोशिश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री बनाकर आदिवासी समुदाय को साधने का संकेत दिया है। अरुण साव और विजय शर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाकर ओबीसी और ब्राह्मण वर्ग को साधने की कोशिश की गई है। राज्य में 15 साल मुख्यमंत्री रह चुके राजपूत चेहरे रमन सिंह को पार्टी ने छत्तीसगढ़ विधानसभा का स्पीकर बनाने की चाल चली है। इस तरह लगभग हर प्रमुख सामाजिक वर्ग को अपने साथ लाने की कोशिशें की गई हैं।  

राजस्थान में मोहन यादव के रूप में ओबीसी चेहरे को साधने की कोशिश की गई है, तो उपमुख्यमंत्री के रूप में ओबीसी चेहरे जगदीश देवड़़ा और ब्राह्मण चेहरे राजेंद्र शुक्ला को अवसर दिया गया है। नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा अध्यक्ष बनाकर राजपूतों को भी सम्मान देने का काम किया गया है।

माना जा रहा है कि इसी तरह राजस्थान में भी प्रमुख सामाजिक समीकरणों को साधने की कोशिश की जा सकती है। अब तक जाट और दलित समुदाय को साथ लाने का काम नहीं हो पाया है। महिला सशक्तिकरण और नारी वंदन कानून लाने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से अभी तक महिलाओं को कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं मिल पाई है। माना जा रहा है कि भाजपा इन समीकरणों को ध्यान में रखते हुए राजस्थान में किसी महिला, जाट और दलित नेता को जिम्मेदारी देने का दांव चल सकती है। इन समीकरणों में दिया कुमारी (महिला), सतीश पूनिया (जाट पिछड़ा वर्ग) और किसी दलित चेहरे को अवसर दे सकती है।

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