दलित मुद्दे पर भाजपा को विपक्ष के साथ-साथ अपने ही सांसदों की नाराजगी आगामी लोकसभा चुनाव में भारी पड़ सकती है। उत्तर प्रदेश के इटावा से सांसद अशोक कुमार धोरे और नगीना से सांसद यशवंत सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर दलित मुद्दे पर सरकार से अपनी नाखुशी व्यक्त की है। वहीं दिल्ली के एक दलित सांसद उदित राज ने रविवार को एक बार फिर कहा है कि दो अप्रैल के भारत बंद के दौरान भड़की हिंसा के बाद से दलित समुदाय के लोगों पर अत्याचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि वह पार्टी और सरकार से यह अपील करते हैं कि वह इस मामले पर फौरन कार्रवाई करें। उदित ने कहा कि वह ऐसे दलित नेताओं में से नहीं हैं जोकि अपनों के ऊपर हो रहे अत्याचार पर भी शांत रहें। जो लोग सही समय पर पार्टी से कार्रवाई करने के बारे में नहीं कह रहे हैं वो स्वार्थी हैं। 2.5 साल पहले मैंने कहा था कि दलित नाराज हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि 2 अप्रैल को दलितों ने बड़े स्तर पर आंदोलन किया। इस आंदोलन में जो दलित शामिल थे उन्हें निशाना बनाया जा रहा है और झूठे केसों में फंसाया जा रहा है। उन्हें बुरी तरह पीटा भी जा रहा है। यह चिंता का विषय है ।
आपको बता दें कि उदित राज ने शनिवार को भी कहा था कि दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान भड़की हिंसा के बाद से दलित समुदाय के लोगों पर अत्याचार किया जा रहा है। देश के कई हिस्सों से ऐसी सूचनाएं मिल रही हैं।
उन्होंने कहा था, ‘बाड़मेर, जालौर, जयपुर, ग्वालियर, मेरठ, बुलंदशहर, करोली और दूसरे कई हिस्सों से दलितों से मारपीट करने और उन पर झूठे मुकदमे करने की शिकायतें मिल रही हैं। खास बात यह है कि उदित राज ने जिन जगहों का नाम लिया है, वे सभी भाजपा शासित राज्यों में हैं।
गौरतलब है कि दलित सांसदों की नाराजगी से दिल्ली में सरगर्मियां बढ़ गयी हैं। पीएम मोदी ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ समेत कई बड़े नेताओं से मुलाकात की है। कयास लगाए जा रहे हैं कि इस मीटिंग में दलित मुद्दे पर भी चर्चा हुई है।