ट्विटर ने उपराष्ट्रपति वैंकेया नायडू और आरएसएस चीफ समेत अन्य पदाधिकारियों के निजी हैंडल से ब्लू टिक जैसे ही हटाया कि देशभर में ट्विटर के खिलाफ आक्रोश भड़क गया। विवाद बढ़ता देख ट्विटर ने आनन-फानन में अपना फैसला वापस लिया और ब्लू टिक बहाल किया। शनिवार को उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, संघ के टॉप नेताओं अरुण कुमार, सुरेश सोनी और सुरेश जोशी के ट्विटर हैंडल से ब्लू टिक हटा दिया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ट्विटर की इस कारवाई से सरकार भी नाराज है और कार्रवाई की योजना बना रही है।
भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने इसे ट्विटर की तानाशाही कार्रवाई बताया है। उन्होंने कहा कि ट्विटर एक विशेष विचारधारा के लोगों के ट्विटर एकाउंट्स से इस तरह की छेड़छाड़ कर लोकतंत्र में विचार की अभिव्यक्ति को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। इस तरह की कोशिश बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सरकार इस पर कड़ी कार्रवाई करेगी।
ट्विटर ने सोची समझी रणनीति के तहत की कार्रवाई- भाजपा
आरएसएस के विशेष जानकार राकेश सिन्हा ने कहा कि यह सामान्य कार्रवाई नहीं है। इसका एक विशेष मतलब है और उस मतलब को समझने की कोशिश की जानी चाहिए। देश में एक लेफ्ट लिबरल विचारधारा का वर्ग है जो केवल उसे ही सही साबित करने पर तुला हुआ है, जो उसके राजनीतिक हित को सही लगता है। ट्विटर इसी लॉबी के प्रभाव में इस तरह की हरकत कर रहा है। इस तरह की कोशिश कर एक विशेष विचारधारा की विश्वसनीयता को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश की जा रही है। यह एक सोची समझी रणनीति है और इसका कड़ा जवाब देने की जरूरत है।
सिन्हा ने कहा कि ट्विटर की यह कार्रवाई देश के अन्दर वैचारिक विभाजन को एक नकारात्मक स्तर पर ले जाने की कोशिश की तरह से देखा जा सकता है। इस वैचारिक खाई को सामान्य वैचारिक अंतर की तरह से नहीं देखा जा सकता। यह देश की एकता को खंडित करने के प्रयास की तरह है और इस पर कड़ा संज्ञान लेने की जरूरत है। भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने कहा कि आज ट्विटर सोशल मीडिया में एकाधिकार जैसी स्थिति में है। यही कारण है कि वह कोई भी मनमानी करने पर उतर आया है। कोई भी कंपनी किसी भी बाज़ार में जब एकाधिकार की स्थिति में आ जाती है तब वह इसी प्रकार मनमानी करने लगती है जैसी कि ट्विटर इस समय कर रही है।
इस मामले में सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी तरह की कार्रवाई के पहले सूचना दी जाती है, लेकिन इतने शीर्ष लोगों के अकाउंट्स के साथ छेड़छाड़ करने के पहले उन्हें किसी तरह की सूचना नहीं दी गई। इस लिहाज से ट्विटर की इस कार्रवाई को शरारतपूर्ण कार्रवाई की तरह से देखा जा रहा है।
सरकार करेगी कड़ी कार्रवाई
ट्विटर और केंद्र सरकार के बीच लोगों की निजता और विचार की अभिव्यक्ति को लेकर संघर्ष चल रहा है। केंद्र सरकार ने एक नीति बनाकर किसी भी फर्जी सन्देश की ट्रेलिंग बताना अनिवार्य कर दिया है। गूगल और फेसबुक ने सरकार की इस नीति से सहमति जताई है तो ट्विटर ने इसे लोगों की निजता का हनन बताकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है। इसी बीच उपराष्ट्रपति और आरएसएस के शीर्ष नेताओं के एकाउंट्स के साथ हुई छेड़छाड़ को इसी सन्दर्भ में देखा जा रहा है।