लोकसभा में शून्यकाल के दौरान भाजपा के दो सांसद अपनी ही सरकार के मंत्री और नौकरशाही पर बुरी तरह झल्ला गए। सांसदों ने कहा कि उनकी न तो नौकरशाह सुनते हैं और न ही मंत्री। सांसद रमेश विधूड़ी ने तो शून्यकाल को रस्मअदायगी बताया और कहा कि यहां उठाई गई समस्याओं और मुद्दों का मंत्रालय की ओर से कोई जवाब ही नहीं आता। वहीं उदित राज ने दिल्ली विकास प्राधिकरण में सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए भलस्वा लेक को नरक बना देने का आरोप लगाया।
शून्यकाल के दौरान विधूड़ी ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए एक बड़ी आबादी को विस्थापित कर वसंतकुंज के पास बसाया गया। मगर 10 साल बाद भी इन्हें बुनियादी सुविधा नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इस मामले में वह कई बार एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के सीईओ और मंत्री से मिले। इनकी ओर से कोई जवाब नहीं आता।
उन्होंने कहा कि नौकरशाही की ओर से सांसदों की बेरुखी का आलम यह है कि अगर सभी विशेषाधिकार हनन का नोटिस देने लगे तो यहां लंबी लाइन लग जाएगी। उन्होंने इस दौरान शून्यकाल के दौरान उठाए गए मुद्दों का भी जवाब न मिलने की बात कही। उन्होंने कहा कि शून्य काल महज रस्म अदायगी बन कर रह गया है। इस मामले में स्पीकर को हस्तक्षेप करना चाहिए।
विधूड़ी के तत्काल बाद दिल्ली केही दूसरे सांसद उदित राज की बारी आई। उन्होंने भलस्वा लेक को तबाह हो जाने का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पर्यटन, बोटिंग के लिए मशहूर हो सकता है, मगर इस लेक से आने वाली बदबू के कारण आसपास के लोगों का जीना मुहाल है। उन्होंने डीडीए अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाया और कहा कि लगातार कोशिशों के बावजूद डीडीए ने इस लेक को सुधारने की पहल नहीं की। इस लेक को एमसीडी और डीडीए ने मिल कर नरक बना दिया है।