दिल्ली विधानसभा का सत्र शुरू होने के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष में जोर आजमाइश शुरू हो गई। दिल्ली के विश्वास नगर से भाजपा विधायक ओम प्रकाश शर्मा ने सदन में 'आतंकवादी' शब्द का प्रयोग कर दिया जिसके बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने इसका कड़ा विरोध किया। सदस्यों के हंगामे के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही आधे घण्टे के लिए रोक दी।
दरअसल, विश्वास नगर से विधायक ओम प्रकाश शर्मा अपने क्षेत्र में गंदे पानी की सप्लाई का मुद्दा उठा रहे थे। उन्होंने कहा कि उनके क्षेत्र में पानी की सप्लाई बेहद कम हो रही है। जो पानी आ भी रहा है, वह बेहद प्रदूषित है और पीने के काबिल नहीं है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को 'सपनों का सौदागर' कहते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने दिल्ली को साफ पानी देने के बहुत से वायदे किये थे, लेकिन उनमें से एक भी वायदा पूरा नहीं हुआ। उलटे अब वे सिंगापुर की तकनीकी लाने की बात कह रहे हैं।
ओम प्रकाश शर्मा जब अपनी बात रख रहे थे, उसी समय आम आदमी पार्टी के अमानतुल्लाह खान सहित कई अन्य विधायकों ने उनकी बात में टोकना शुरू कर दिया। इससे खफा हुए शर्मा ने कहा कि वे क्यों 'आतंकवादियों की तरह' उनकी बातों में रुकावट पैदा कर रहे हैं। इसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों में तेज बहस होने लगी। ओम प्रकाश शर्मा ने भी हंगामा बढ़ता देख सदन से वाक आउट कर दिया।
'यह स्वीकार नहीं'
इसके बाद सदन में पहुंचे दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस समय देश में एक सरकार है जो इस तरह का माहौल बनाना चाहती है कि जिसके भी नाम के साथ खान लगा हो, उसे आतंकवादी कह दिया जाए। उन्होंने विपक्ष को भी उसी तरह की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह कत्तई स्वीकार नहीं किया जा सकता।
शर्मा ने किया बचाव
ओ पी शर्मा ने सदन के बाहर अपने बयान का बचाव किया और कहा कि आप के सदस्य उनसे मारपीट करने की नीयत से सदन के वेल में आ गए थे। इससे साफ जाहिर होता है कि वे गलत नीयत से आये थे। उन्होंने कहा कि इस देश ने देखा है कि जब जब देश विरोधी बात होती है, केजरीवाल और उनकी पार्टी उसके साथ खड़े दिखाई देते हैं। वे JNU प्रकरण में भी देश को तोड़ने की बात करने वालों के पक्ष में खड़े थे और आज भी NRC और बांग्लादेशी घुसपैठियों के मुद्दे पर सरकार का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने सरकार से NRC के मुद्दे पर चर्चा की मांग की तो उनकी मांग को खारिज कर दिया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि कौन किसके साथ खड़ा है।