सादर लिंगायत समुदाय से आने वाले बसवराज बोम्मई ने बुधवार को कर्नाटक के 23वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली। राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने राजभवन में एक सादे समारोह में बोम्मई को पद व गोपनियता की शपथ दिलाई
र्नाटक के अगले मुख्यमंत्री के चयन से पहले चर्चा थी कि भाजपा बुजुर्ग नेताओं को हटाने पर ध्यान दे रही है। लेकिन लिंगायत समुदाय और येदियुरप्पा के चहेते बोम्मई को सिंहासन सौंपकर भाजपा ने 2023 विधानसभा चुनाव के लिए वोट बैंक संतुलन को संभाल लिया है। लिंगायत समुदाय कर्नाटक में भाजपा का प्रमुख वोट बैंक है, येदियुरप्पा भी इसी समुदाय से आते हैं। ऐसे में बोम्मई का चयन हर हाल में सुरक्षित माना जा रहा है।
बोम्मई ने एक प्रभावी, ईमानदार और जनता के लिए काम करने वाली सरकार का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा, वह सभी को साथ लेकर चलेंगे। सरकार एक टीम के तौर पर काम करेगी। कोविड व अन्य स्वास्थ्य मुद्दों के साथ ही बाढ़ से प्रभावित लोगों के बचाव के लिए पूरी ताकत से काम किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा, हमारे सभी फैसले यह ध्यान में रखते हुए लिए जाएंगे कि समाज के अंतिम व्यक्ति- गरीब, किसानों, पिछड़े और शोषित लोगों को उसका लाभ मिले तथा क्षेत्रीय असंतुलन से भी मुक्ति मिले।
मुख्यमंत्री बनने वाली दूसरी पिता-पुत्र जोड़ी
बोम्मई के पिता स्वर्गीय एसआर बोम्मई कर्नाटक के 11वें मुख्यमंत्री रहे। अब बोम्मई के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही कर्नाटक का सीएम बनने वाली यह दूसरी पिता-पुत्र जोड़ी बन गई है। इससे पहले एचडी देवेगौड़ा और उनके बेटे एचडी कुमारस्वामी भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं।