कांग्रेस नेता राहुल गांधी के लंदन में दिए हालिया बयानों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच इन दिनों तीखी बहस जारी है। इस बीच, पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर राहुल की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा कि आप जिस चीज में भरोसा रखते हैं, उसके लिए खड़े हों, इसका मतलब यह है कि भले ही आप अकेले खड़े हों। इस पोस्ट पर भाजपा नेता तेमजेन इमना अलोंग ने चुटकी ली है।
नगालैंड भाजपा प्रमुख तेमजेन ने राहुल की तस्वीर की प्रशंसा करते हुए लिखा- मानना पड़ेगा..फोटो तो अच्छी आई। कॉन्फिडेंस और पोज नेक्स्ट लेवल है। तेमजेन सोशल मीडिया पर अपनी चुटीली टिप्पणियों के लिए जाने जाते हैं। जैसे ही भाजपा नेता राहुल गांधी की इस तस्वीर पर टिप्पणी की, कई सोशल मीडिया यूजर्स के लिए यह एक मनोरंजक क्षण बन गया।
राहुल गांधी की ब्रिटेन यात्रा चर्चाओं के केंद्र में बनी हुई है। भाजपा उन पर विदेशी धरती पर भारत और उसके लोकतंत्र का अपमान करने का आरोप लगा रही है। लंदन में राहुल गांधी ने अलग-अलग कार्यक्रमों में अपने भाषणों में भारत, आरएसएस, भारत-चीन मुद्दे आदि के बारे में बात की।
भारत में लोकतंत्र, संसद और न्यायपालिका को लेकर दिए गए राहुल गांधी के बयानों की पूर्व केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता रविशंकर प्रसाद ने आलोचना की, तो कांग्रेस ने कहा कि भाजपा ने राहुल गांधी के बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश किया, उन्हें बदनाम किया।
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संसद में विपक्षी नेताओं के माइक्रोफोन बंद करने के राहुल गांधी के आरोपों का विरोध करते हुए भाजपा ने संसद में राहुल गांधी की उपस्थिति के आंकड़ों का हवाला दिया और कहा कि उनकी उपस्थिति राष्ट्रीय औसत और केरल के औसत से काफी कम है। भाजपा के अमित मालवीय ने कहा, 'राहुल गांधी उस लापरवाह स्कूली छात्र की तरह हैं, जो जब उनके शिक्षक द्वारा पूछा जाता है कि उनका होमवर्क कहां है, तो वह झूठ बोलते हैं।
राहुल गांधी द्वारा आरएसएस की तुलना मुस्लिम ब्रदरहुड से किए जाने पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि राहुल गांधी को संगठन को समझने के लिए आरएसएस शिविरों में भाग लेना चाहिए।
आरएसएस को लेकर राहुल गांधी ने टिप्पणी की थी, आप इसे एक गुप्त समाज कह सकते हैं। यह मुस्लिम ब्रदरहुड की तर्ज पर बनाया गया है और विचार यह है कि सत्ता में आने के लिए लोकतांत्रिक प्रतियोगिता का उपयोग किया जाए और फिर बाद में लोकतांत्रिक प्रतियोगिता को नष्ट कर दिया जाए।
उन्होंने कहा, मुझे इस बात से हैरानी हुई है कि वे हमारे देश के विभिन्न संस्थानों पर कब्जा करने में कितने सफल रहे हैं: प्रेस, न्यायपालिका, संसद, चुनाव आयोग - सभी संस्थान दबाव में हैं, खतरे में हैं और किसी न किसी तरह से नियंत्रित हैं।