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भाजपा का सख्त आदेश, 7 और 8 फरवरी को सभी लोकसभा सांसद सदन में देंगे हाजिरी

Tue, 06 Feb 2018 05:02 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाजपा ने मंगलवार को अपने सभी लोकसभा सांसदों को चेतावनी दी है कि उन्हें 7 और 8 फरवरी को सदन में रहना जरूरी होगा। हालांकि इससे पहले भी कई बार भाजपा ने अपने सांसदों को सदन में बुलाया है। बता दें कि वहीं दूसरी ओर मंगलवार को राज्यसभा में हंगामे के बाद विपक्षी पार्टियों ने सदन का बहिष्कार कर दिया। विपक्ष ने राज्यसभा अध्यक्ष पर आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 
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विपक्ष ने कह कि हमें राज्यसभा में बोलने नहीं दिया जा रहा है। हम कुछ मुद्दों पर बात करना चाहते थे लेकिन हमें अध्यक्ष ने बोलने से मना कर दिया। वहीं कांग्रेस नेता आनंद कुमार ने कहा कि देश के कोने कोने से आए प्रतिनिधियों को राज्यसभा में बोलने नहीं दिया जा रहा है। यह कैसा लोकतंत्र है।  
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बता दें कि कल राज्यसभा में अमित शाह का पहला भाषण था इस दौरान भी काफी गहमागहमी रही। अमित शाह के भाषण के बाद कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने उन्हीं की भाषा में उन्हें जवाब दिया था। गुलाम नबी आजाद ने सरकार द्वारा गिनाई जा रही उपलब्धियों को सिरे से खारिज करके उस पर जनता से झूठे वादे करने, जुमला गढ़ने, सपने दिखाने का आरोप लगाया। 

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह सरकार कोई क्रांतिकारी काम नहीं कर रही है। यह गेम चेंजर (खेल पलटने वाली) नहीं बल्कि नेम चेंजर (नाम बदलने वाली) है। आजाद ने प्रधानमंत्री के न्यू इंडिया को नकारते हुए कहा कि हमें और देश को यह न्यू इंडिया नहीं चाहिए, हमें आप हमारा पुराना भारत लौटा दो।

गुलाम नबी आजाद ने बिना नाम लिए कहा कि अमित शाह अपने संबोधन में जिस वंशवाद और एक परिवार के 55 साल तक शासन की बात कर रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि 25-30 साल में इस परिवार का कोई व्यक्ति न तो देश का प्रधानमंत्री बना है और न ही मंत्री। ऐसे में उन्होंने किस वंशवाद से निजात दिलाई? आजाद ने नेहरु-गांधी परिवार से भाजपा के डर का तंज कसते हुए कहा कि आपके (भाजपा) भीतर जो डर बैठा हुआ है और उससे भाजपा नेताओं को नींद नहीं आ रही है, तो उसका कांग्रेस पार्टी क्या करें?

जातिवाद के अमित शाह के वक्तव्य पर भी आजाद ने तंज कसा। उन्होंने इसके लिए भाजपा की बंटवारे की राजनीति को भी हाशिए पर लिया। तुष्टीकरण को लेकर भी आजाद ने कहा कि आज पूरे देश में एक ही पार्टी के लोगों को काम, रोजगार, नौकरी, हक सब मिल रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए ऐसी भयानक पहल इससे पहले कभी नहीं हुई थी।
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