भाजपा नेता विनय कटियार ने कहा है कि अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला देता है, वे उसे स्वीकार करेंगे। लेकिन अयोध्या में राम जन्मभूमि के अलावा और कुछ भी स्वीकार नहीं होगा। भाजपा नेता का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब सुप्रीम कोर्ट अयोध्या मामले पर 16 तारीख से पहले अपना फैसला सुना सकता है। मामले की संवेदनशीलता देखते हुए आरएसएस और भाजपा नेता मुस्लिम नेताओं के साथ मिलकर समाज में शांति बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने अयोध्या में शांति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी है।
1984 के बाद इस समिति की फिर होगी बैठक
विनय कटियार यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि राम मंदिर का मुद्दा अब लगभग सुलझ गया लगता है। इसके बाद अब वे काशी और मथुरा में बने मंदिरों के आसपास बने 'अवरोध' को हटाने के लिए आंदोलन चलाएंगे। इसके लिए वे जल्दी ही 'धर्म स्थान मुक्ति यज्ञ समिति' की बैठक बुलाएंगे और बैठक में आगे की रणनीति पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। बता दें कि यह वही समिति है, जिसकी 1984 में हुई एक बैठक के बाद राम मंदिर आंदोलन को तेज करने का निर्णय लिया गया था। इस बैठक में बाला साहब देवरस, स्वामी परमहंस दास, दाउ दयाल खन्ना, महेश नारायण सिंह, अशोक सिंघल और स्वयं विनय कटियार उपस्थित थे।
सुप्रीम कोर्ट ने दिखाया रास्ता
विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखा बजरंग दल के संस्थापक अध्यक्ष रह चुके विनय कटियार ने अमर उजाला से कहा कि वे सुप्रीम कोर्ट के प्रति अपना आभार प्रकट करते हैं कि उसने रोजाना सुनवाई का फैसला कर इस मामले को अपने मुकाम तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया। कटियार ने कहा कि अगर इस मामले में यही संवेदनशीलता छोटी अदालतों ने भी दिखाई होती, तो भारत के इतिहास में 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में घटित घटना नहीं होती।
शांति के प्रयास लगातार जारी
अयोध्या मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए समाज के सभी वर्गों से शांति बनाये रखने के लिए लगातार अपील की जा रही है। केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मंगलवार शाम को आरएसएस के प्रमुख नेताओं के साथ अल्पसंख्यक वर्ग के नेताओं से मुलाकात की और शांति बनाए रखने की अपील की। वहीं जमीयत-उलेमा-ए-हिंद के नेता मौलाना सैयद अरशद मदनी की आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मुलाकात प्रस्तावित है। माना जा रहा है कि दोनों नेता मुलाकात के बाद समाज के सभी वर्गों से शांति बनाए रखने की अपील करेंगे।