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राजस्थान से मिले गम के बीच पश्चिम बंगाल में बढ़ते आधार से भाजपा में उत्साह 

Sun, 04 Feb 2018 11:29 AM IST
संजय मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाजपा
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उपचुनाव में हार के रूप में राजस्थान से मिले गम के बीच भाजपा में पश्चिम बंगाल के परिणामों को लेकर उत्साह है। पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि धीरे-धीरे जमीन पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति काम करती नजर आ रही है। यदि गुरूवार को पश्चिम बंगाल में आए उल्लूबेरिया लोकसभा और नोआपारा विधानसभा चुनाव के नतीजों पर नजर दौड़ाएं तो भाजपा इन दोनों ही सीटों पर जीत दर्ज करने में बेशक नाकाम रही है। मगर कांग्रेस और वाम दल को पीछे छोड़ते हुए पार्टी नंबर दो पर पहुंचने में कामयाब रही है। इन उपचुनाव के परिणामों ने राज्य की जनता में यह साबित कर दिया है कि भाजपा ही ममता का विकल्प बन सकती है। राज्य भाजपा प्रभारी एवं पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का कहना है कि यदि चुनाव में सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग नहीं होता तो परिणाम दूसरे ही होते। पार्टी के बढ़ते आधार पर खुशी जताते हुए उन्होंने उम्मीद जताई की भाजपा ही राज्य की ममता सरकार को उखाड़ सकती है। 
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मिशन 2019 के तहत भाजपा की है बंगाल पर नजर

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मिशन 2019 के लिए पश्चिम बंगाल, उडीशा, आंध्र प्रदेश, केरल और तमिलनाडु सरीखे राज्यों के लिए अलग-अलग विशेष रणनीति बनाई है। जहां पार्टी का आधार कभी मजबूत नहीं रहा। पश्चिम बंगाल की कमान अपने सबसे विश्वस्त राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को सौंपने के अलावा शाह ने संघ प्रचारक एवं राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश को संगठन की मजबूती के लिए मैदान में उतार रखा है। बताया जा रहा है कि पिछले दो वर्षों में विधानसभा स्तर पर दौरे कर शिवप्रकाश ने संगठन को मजबूत बनाया है। अब उनकी कवायद सूबे के सभी विधानसभा सीटों में बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की बूथ कमेटी बनाने पर है ताकि ममता बनर्जी के विरूद्ध जमीन पर भाजपा लड़ाई लड़ सके।

पार्टी के एक वरिष्ठ महासचिव के अनुसार सूबे की जनता में पीएम मोदी के प्रति विशेष लगाव है। उसे वोट में परिवर्तित करने के लिए जमीन पर संगठन को मजबूत करना जरूरी है। इस दिशा में तेजी से काम चल रहा है। राज्य की करीब 50 प्रतिशत विधानसभा सीटों पर भाजपा ने अपनी बूथ कमेटी का गठन कर लिया है। शायद यही वजह है कि उपचुनाव के नतीजे शाह की रणनीति को जमीन पर सफल होते बता रहे हैं। सूबे में भाजपा ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ मुख्य पार्टी के रूप में उभरती जा रही है। जबकि पहले वाम दल और कांग्रेस का इस प्रदेश में दबदबा रहता था। अब वाम और कांग्रेस को पीछे छोड़ भाजपा नंबर दो बन गई है। 
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क्या है भाजपा के उत्साह की वजह 

गुरुवार को आम बजट की पेशी के दिन राजस्थान के साथ पश्चिम बंगाल में लोकसभा की एक और एक विधानसभा सीट पर आए उपचुनाव के नतीजों से यह साफ दिखता है कि भाजपा सूबे की जनता के बीच पसंद के रूप में नंबर दो पार्टी बन गई है। उलबेरिया लोकसभा उपचुनाव के नतीजों पर गौर करें तो टीएमसी ने 767219 (62.17 प्रतिशत) वोट लेकर सीट जीती है। मगर 293018 (23.74 प्रतिशत) वोट लेकर भाजपा का उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहा है। आलम यह है कि वाम और कांग्रेस उम्मीदवार को मिले वोट जोड़कर भी भाजपा के करीब नहीं पहुंच रहे हैं। वाम दल के उम्मीदवार को यहां 138792 (11.24 प्रतिशत) मिले हैं तो कांग्रेस उम्मीदवार को 23108 (1.87 प्रतिशत) और नोटा को 11768 (0.95 प्रतिशत) वोट मिले हैं। जबकि इससे पहले इस सीट पर लोकसभा चुनाव 2014 में वाम उम्मीदवार को 369563 और कांग्रेस उम्मीदवार को 67286 वोट मिले थे। ऐसी ही स्थिति कमोबेश नोआपारा विधानसभा सीट की भी रही।

ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार ने 101729 वोट लेकर सीट पर जीत दर्ज की है। तो 38711 मतों के साथ भाजपा उम्मीदवार दूसरे नंबर पर रहा। माकपा उम्मीदवार को 35497 वोट मिले और कांग्रेस उम्मीदवार के खाते में महज 10527 वोट गिरे हैं। जबकि 2016 के चुनाव में टीएमसी उम्मीदवार को इस सीट पर महज 78543 वोट मिले थे और कांग्रेस-वाम गठजोड़ के मुकाबले उसका उम्मीदवार हार गया था। कांग्रेस-वाम उम्मीदवार को 79548 वोट मिले थे। तब इस सीट पर भाजपा के उम्मीदवार को महज 23579 वोट मिले थे। मगर इस दफे भाजपा अपनी स्थिति में सुधार करते हुए दूसरे स्थान पर पहुंचने में कामयाब रही है। जबकि यहां भी कांग्रेस और वाम के वोट गिरे हैं। यही वजह है कि भाजपा को पश्चिम बंगाल में अपना भविष्य सुनहरा नजर आ रहा है। आने वाले समय में भाजपा सूबे की ममता सरकार के खिलाफ और अक्रामक रुख अपनाएगी।
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