2जी आरोपियों के बरी होने के बाद से कांग्रेस नेताओं को जहां अच्छे दिनों का अहसास होने लगा है वहीं भाजपा सकते में है। पार्टी को इस बात की उम्मीद नहीं थी कि देश के सबसे बड़े घोटाले के आरोपी इतनी आसानी से बरी हो जाएंगे।
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 1 लाख 76 हजार करोड़ के 2जी घोटाले को जोर-शोर से उठाते हुए कांग्रेस के खिलाफ भ्रष्टाचार को बड़ा सियासी मुद्दा बनाया था। अब पार्टी के हाथ से यह मुद्दा जाता दिख रहा है।
अदालत के निर्णय के बाद कांग्रेस पार्टी ने हमलावर रुख अपनाते हुए उल्टे भाजपा से माफी की मांग कर दी है। कांग्रेस के हमलावर रुख को देखते हुए भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुट गई है।
मोर्चा संभालते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली सरकार की ओर से प्रतिक्रिया देने सबसे पहले सामने आए। उसके बाद उन्होंने पार्टी के तमाम प्रवक्ताओं की आनन-फानन में बैठक कर उन्हें आगे बढ़ने की लाइन के साथ विशेष टिप्स दिए।
मजबूरी....अपना बचाव करें या विनोद राय का
भाजपा के सामने मजबूरी इस बात की आ गई है कि अदालत के फैसले के बाद वह अपना बचाव करे या पूर्व सीएजी विनोद राय का। विपक्ष ने भाजपा के साथ राय पर भी हमले तेज कर दिए हैं।
राज्यसभा में राय को तलब कर उनसे माफी मंगवाने की जब मांग उठी, तब भाजपा सांसद मौन रहे। सपा सांसद नरेश अग्रवाल ने राज्यसभा में मामला उठाते हुए कहा कि क्या सीएजी की रिपोर्ट संसद सभा पटल पर पेश होने से पहले लीक की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि 2जी मामले पर सीएजी की रिपोर्ट सदन में आने से पहले मीडिया को लीक की गई। इसके आधार पर केस भी दर्ज किया गया। इसे यूपीए सरकार की छवि खराब करने का षड्यंत्र करार देते हुए अग्रवाल ने कहा कि वे संसद की पीएसी समिति में रहे हैं और देखा है कि सीएजी के अधिकांश सवाल पीएसी समिति में आते ही खत्म हो जाते हैं। फिर 2जी मामले में इतना बवंडर क्यों मचाया गया।
उन्होंने सभापति से पूर्व सीएजी को सदन में बुलाने की मांग करते हुए कहा कि उनसे सवाल किए जाने चाहिए और उनसे जुड़े लोगों को माफी मांगनी चाहिए। इस दौरान भाजपा के सांसद मौन रहे। अब पार्टी की यह मजबूरी बन गई है कि वो अपना बचाव करे या विनोद राय का।