कर्नाटक में कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार गिराने के बाद भाजपा सरकार बनाने को ले कर हड़बड़ी में नहीं है। इस दिशा में कदम बढ़ाने से पहले पार्टी नेतृत्व कांग्रेस-जेडीएस के 15 बागी विधायकों के संबंध में स्पीकर या सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहती है। पार्टी में सीएम पद को ले कर संशय नहीं है। सरकार की कमान पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा ही संभालेंगे।
बृहस्पतिवार को राज्य में भावी रणनीति तय करने केलिए पार्टी के राज्य इकाई के वरिष्ठ नेता जगदीश शेट्टार और अरविंद लिम्बावली ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा से दो बार मुलाकात की। मुलाकात में तय हुआ कि सरकार गठन की दिशा में आगे बढने से पहले 15 बागी विधायकों पर सुप्रीम कोर्ट या स्पीकर के निर्णय का इंतजार किया जाए। पार्टी सूत्रों ने बताया कि इस बैठक में येदियुरप्पा केभावी सरकार की कमान देने पर आम सहमति थी।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता केमुताबिक इस समय भाजपा के पक्ष में 107 विधायक हैं। मुश्किल यह है कि अभी तक बागी विधायकों के संदर्भ में फैसला नहीं हुआ है। अगर स्पीकर ने इन बागी विधायकों को अयोग्य कर दिया तो सरकार बनाने की राह आसान हो जाएगी। इसके अलावा पार्टी को चिंता है कि अगर निर्णय में कुछ भी उलटफेर हुआ, कुछ बागी विधायक फिर से पुराने गठबंधन के पक्ष में खड़े हुए तो मुश्किल हो जाएगी।
नेतृत्व चाहता है कि सरकार बनाने का दावा पेश करने से पहले बागी विधायकों पर फैसला होने के साथ ही इन विधायकों के साथ पार्टी नेताओं की ठोस बातचीत हो जाए। इसके अलावा नेतृत्व चाहता है कि पार्टी को कुछ और विपक्षी दलों के विधायकोंका समर्थन हासिल हो, जिससे भविष्य में सरकार की स्थिरता को ले कर कोई संशय नहीं रहे।
राष्ट्रपति शासन भी विकल्प
अगर बागी विधायकों पर फैसला आने में देरी हुई तो मोदी सरकार राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने का विकल्प भी चुन सकती है। एक धड़े का मानना है कि राष्ट्रपति शासन लगा कर सियासी स्थिति को पूरी तरह से पार्टी के पक्ष में आ जाने का इंतजार करना चाहिए। हालांकि ऐसा तभी होगा जब बागी विधायकों पर निर्णय आने में देरी होगी।