भाजपा ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लमिन (एआईएमआईएम) के सांसद इम्तियाज जलील पर निशाना साधा है। दरअसल, जलील ने कहा था कि यदि मस्जिदें नहीं खोली गईं तो वे सड़क पर नमाज पढ़ेंगे। एआईएमआईएम सांसद ने धार्मिक स्थल न खोलने के फैसले को लेकर महाराष्ट्र सरकार से सवाल पूछे हैं।
भाजपा नेता एनवी सुभाष ने कहा कि एआईएमआईएम द्वारा ऐसे समय पर दिया गया अल्टीमेटम हास्यास्पद है जब देश कोरोना वायरस संकट से लड़ रहा है। भाजपा नेता एनवी सुभाष पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के पोते हैं। सुभाष ने कहा, 'सांसद होने के नाते, एआईएमआईएम नेता को धार्मिक तर्ज पर मुसलमानों को नहीं उकसाना चाहिए, तब जब राष्ट्र को सामान्य स्थिति में पहुंचना है।'
उन्होंने पूछा, 'वह राज्य सरकार को चेतावनी कैसे दे सकते हैं कि वे मस्जिद खोलने की मांग को लेकर मुसलमानों के साथ सड़कों पर नमाज पढ़ेंगे।' भाजपा नेता ने बताया कि महाराष्ट्र में देश में कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मामले हैं। उन्होंने महामारी के दौरान धार्मिक मामलों पर लोगों को उकसाने के लिए सांसद के खिलाफ मामला दर्ज करने की भी मांग की।
सांसद के गणेश विसर्जन के साथ मस्जिदों को खोले जाने की तुलना को खारिज करते हुए भाजपा नेता ने कहा कि यह उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि गणपति की मूर्तियों का विसर्जन एक ऐसा कार्यक्रम है जो एक या दो दिन में पूरा हो जाता है और इसमें लॉकडाउन के नियमों का पालन किया जाएगा।
यह भी पढ़ें- एआईएमआईएम विधायक ने तोड़ा लॉकडाउन, पुलिस ने मजबूरन हटाए बैरिकेड्स
भाजपा नेता का बयान ऐसे समय पर सामने आया है जब एक दिन पहले एआईएमआईएम सांसद ने ट्विटर पर मस्जिदों को खोलने की मांग की थी। उन्होंने लिखा था, 'जब व्यवसाय, कारखाने, बाजार खुल गए हैं और यहां तक कि बसें, ट्रेनों और फ्लाइटों का संचालन किया जा रहा है, तो सरकार को किसने बताया है कि कोरोना केवल धार्मिक स्थानों से फैलेगा। सरकार के लिए राजस्व अर्जित करने वाली शराब की दुकानें भी खुल गई हैं और यहां तक कि सीमित लोग भी विवाह में इकट्ठा हो सकते हैं, ऐसे में केवल धार्मिक स्थान क्यों बंद हैं।'
उन्होंने आगे लिखा था, ‘हम सभी ने अपने चिकित्सा ढांचे में सुधार को लेकर छह महीने तक सरकार के साथ सहयोग किया और अब सब कुछ खुल गया है तो केवल धार्मिक स्थलों को बंद क्यों रखा है। यह तर्कहीन है। महाराष्ट्र सरकार को मेरा अल्टीमेटम है कि एक सितंबर से सभी मंदिरों को खोलें और हम दो सितंबर से सभी मस्जिदें खोल देंगे। यदि हमारी मांग नहीं मानी गई तो हम सड़कों पर नमाज अदा करेंगे।’