देश में सबसे अधिक साक्षरता दर वाले राज्य केरल के सहारे भाजपा दक्षिण में अपनी स्थिति मजबूत करने को लेकर बेहद आशान्वित है। शायद यही वजह है कि उसने राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर को पहली बार लोकसभा चुनाव में उतार दिया है। वह भी, तिरुवनंतपुरम सीट पर तीन बार के सांसद कांग्रेसी दिग्गज शशि थरूर के मुकाबले। राज्य में कुल 20 लोकसभा क्षेत्र हैं और भाजपा ने यहां कभी भी संसदीय सीट नहीं जीती है। इस बार वह यहां खाता खोलने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है।
2019 के लोकसभा चुनाव में थरूर 41.4 फीसदी वोट पाकर जीते थे। भाजपा के कुम्मनम राजशेखरन 31.4 फीसदी वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। भाजपा को पूरी उम्मीद है कि इस बार थरूर के सामने कद्दावर चेहरा उतारकर यह सीट जीती जा सकती है। थरूर को यहां वामपंथी दलों से भी चुनौती मिलेगी। ऐसे में भाजपा को उम्मीद है कि वह 38-40 फीसदी वोट हासिल कर पहली बार यह सीट अपने नाम कर सकती है।
हालांकि, शशि थरूर का कहना है कि क्षेत्र में उनका 15 वर्षों का काम बोलेगा। उन्होंने कहा कि डेढ़ दशक से वे यहां के लोगों की सेवा कर रहे हैं। उनके ट्रैक रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है, जिसके लिए उन्हें शर्मिंदा होना पड़े। उन्होंने दावा किया कि वे जनता के प्रमुख मुद्दों को उठाते रहे हैं। वहीं, विश्लेषकों का मानना है कि सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश का मसला भाजपा के लिए जनाधार बढ़ाने का काम करेगा।
तीसरा कोण वाम मोर्चा
मेरा ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा:शशि थरूर
मैंने तिरुवनंतपुरम के लोगों की 15 वर्षों तक सेवा की है। मेरा ट्रैक रिकॉर्ड हमेशा अच्छा रहा है। मैं सभी के लिए उपस्थित रहा हूं। यहां हमेशा त्रिकोणीय लड़ाई रही है। पूरा विश्वास है कि मैं जीतूंगा।
थरूर को सता रहा लेफ्ट का डर
वर्ष 2009, 2014 व 2019 में लगातार चुनाव जीतकर हैट्रिक लगाने वाले थरूर को लेफ्ट से खतरा है, क्योंकि यहां हमेशा त्रिकोणीय लड़ाई रही है। थरूर से पहले यह सीट दो बार लेफ्ट ने ही जीती थी। ऐसे में उन्हें भाजपा के साथ ही लेफ्ट के उम्मीदवार को भी गंभीरता से लेना होगा।
चौंका सकते हैं चंद्रशेखर
राजीव चंद्रशेखर पहली बार चुनावी मैदान में हैं। वह एक कुशल प्रौद्योगिकी उद्यमी हैं, जिन्होंने इंटेल जैसे वैश्विक तकनीकी दिग्गजों के साथ काम किया है। भाजपा का मानना है कि त्रिशूर में पारिवारिक जड़ें रखने वाले चंद्रशेखर तिरुवनंतपुरम में चौंका सकते हैं। केंद्रीय मंत्री बनने से पहले वह भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे थे। चंद्रशेखर ने अपनी उम्मीदवारी को लेकर कहा कि उनका इरादा यहां के लोगों को यह दिखाने का है कि भाजपा और मोदी सरकार तिरुवनंतपुरम में विकास की रफ्तार को कितना तेज कर सकती है। चंद्रशेखर ने कहा कि भाजपा तिरुवनंतपुरम को एक ऐसा स्थान बना सकती है, जो प्रौद्योगिकी, पर्यटन, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण, अनुसंधान और विज्ञान के लिए जाना जाए।
भाजपा चंद्रशेखर पर क्यों निर्भर
केरल में अभी तक भाजपा ने खाता नहीं खोला है। ऐसे में वह काफी हद तक चंद्रशेखर पर निर्भर रहेगी ताकि उसे शुरुआती बढ़त हासिल हो सके। इस बीच, थरूर के लिए अपने घरेलू मैदान पर इन चुनावों में जीत हासिल करना बेहद जरूरी है।
तिरुवनंतपुरम में छह विधानसभा क्षेत्र हैं:-