लोकसभा में ब्रांड मोदी का विकल्प नहीं है, मगर विधानसभा में मतदाताओं का बड़ा वर्ग स्थानीय मुद्दे और चेहरे को कसौटी पर कसता है। लोकसभा से ठीक पहले भाजपा ने जिन तीन राज्यों मप्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवाई। उन्हीं राज्यों में लोकसभा चुनाव में महज ब्रांड मोदी के भरोसे पार्टी ने विपक्ष का करीब सूपड़ा साफ कर दिया। हरियाणा, झारखंड, महाराष्ट्र में पार्टी के सीएम ही परेशानी का कारण बने, तो दिल्ली में कद्दावर स्थानीय नेता।
इसलिए चिंता में है पार्टी...
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा में भी ब्रांड मोदी का जलवा था। तब लोकसभा चुनाव के मुकाबले हरियाणा, झारखंड सहित कई राज्यों में पार्टी के मत प्रतिशत में 5% की कमी आई थी। अब 2019 के चुनाव के बाद राज्यों में यह गिरावट 22% तक जा पहुंची।