भारतीय जनता पार्टी ने यह आरोप भी लगाया है कि अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के नेतृत्व में शुरू किए गए इस अभियान को बाद में सत्ता में आई यूपीए सरकार ने पर्याप्त सहयोग नहीं दिया जिससे इस मिशन को पूरा होने में समय लगा। जबकि कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इसके लिए इसरो की स्थापना करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और देश के वैज्ञानिकों को श्रेय दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के अभियानों से हमेशा सत्तारूढ़ दल को लाभ मिलता है, लेकिन इस पर राजनीति करने से बचा जाना चाहिए।
यहां से हुई राजनीति की शुरुआत
दरअसल, जिस समय चंद्रयान 3 चांद की सतह पर उतरने वाला था, उसके चंद क्षणों पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी टीवी पर आ गए। ब्रिक्स समिट के लिए द. अफ्रीका पहुंचे पीएम मोदी वर्चुअल तरीके से चंद्रयान 3 की लैंडिंग के समय जुड़े। चंद्रयान 3 की सफलतापूर्वक लैंडिंग के बाद उन्होंने इसे देश की महान उपलब्धि बताया और इसके लिए पूरे देश, वैज्ञानिकों और देशवासियों को बधाई दी।
लेकिन पीएम मोदी के टीवी पर आते ही विपक्षी दलों और राजनीतिक विश्लेषकों ने मिशन चंद्रयान का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए भाजपा पर हमला कर दिया। वरिष्ठ राजनीतिक टिप्पणीकार आशुतोष ने अमर उजाला से कहा कि यह देश के वैज्ञानिकों की उपलब्धि है। ऐसे अवसरों पर देश सबसे पहले इस अभियान से जुड़े वैज्ञानिकों के अनुभव को सुनना चाहता है। लेकिन इस अवसर पर भी पीएम मोदी को सबसे ज्यादा बोलने का अवसर मिला और इसे उनकी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया। लेकिन यह सही नहीं था।
देश के हर कदम में आगे बढ़कर भूमिका निभाते हैं प्रधानमंत्री
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल ने कहा कि प्रधानमंत्री के पूरे राजनीतिक करियर को देखा जाए तो एक बात समझ में आ जाती है कि जहां भी देश की बात होती है, प्रधानमंत्री हमेशा आगे बढ़कर वैज्ञानिकों, युवाओं, बेटियों, छात्रों का साथ देते हैं। वे उन राजनेताओं में नहीं हैं जो अपने कमरे में बैठकर राजनीति करते हैं। बल्कि वे स्वयं जमीन पर उतरकर लोगों के बीच जाते हैं, उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा कि परिवार के एक सफल मुखिया की यही पहचान होती है। इस मामले के राजनीतिकरण का आरोप लगाने के लिए उन्होंने विपक्ष को फटकार भी लगाई।
कांग्रेस ने चंद्रयान की राह में रोड़े अटकाए- अमित मालवीय
भाजपा नेता अमित मालवीय ने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 2003 में ही लाल किले से संबोधन देते हुए चंद्रयान प्रथम अभियान की घोषणा कर दी थी। इसे 2008 में पूरा किया गया। लेकिन बाद में कांग्रेस ने इस अभियान को सहयोग नहीं दिया जिससे मिशन चंद्रयान 2 समय पर पूरा नहीं किया जा सका। मिशन चंद्रयान के दूसरे चरण के लिए 2014 तक प्रतीक्षा करनी पड़ी जब भाजपा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सत्ता में आई।
अमित मालवीय ने यह भी आरोप लगाया है कि सभी चंद्रयान के मिशन भाजपाई प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में ही पूरे हुए, जबकि कांग्रेस ने इस अभियान को कमजोर करने का काम किया। उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू की वैज्ञानिक सोच पर भी निशाना साधा।
कांग्रेस ने कहा, वैज्ञानिकों की सफलता
वहीं, कांग्रेस ने चंद्रयान 3 की सफलता के लिए देश के वैज्ञानिकों को श्रेय दिया है। पार्टी के मीडिया प्रभारी जयराम रमेश ने कहा है कि इसके लिए उन वैज्ञानिकों को बधाई दिया जाना चाहिए जिन्होंने इस मिशन को सफल बनाया। इसरो की स्थापना करने के लिए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को भी याद किया। उन्होंने कहा कि यह नेहरू की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि आज भारत नए-नए कीर्तिमान हासिल कर रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर सोनिया गांधी का इसरो वैज्ञानिक एस. सोमनाथ को लिखा बधाई पत्र भी साझा किया है।
चंद्रयान 3 से किसे मिलेगा लाभ
अब तक का इतिहास बताता है कि इस तरह के किसी भी बड़े अभियानों का सत्तारूढ़ दल को लाभ मिलता रहा है। इंदिरा गांधी को भी मिशन चंद्रयान का लाभ मिला था जब उन्होंने चांद पर पहुंचने वाले देश के पहले यात्री राकेश शर्मा से बात की थी। बांग्लादेश के युद्ध के अभियान के बाद जनता के बीच उनकी स्थिति शेरनी जैसी बन गई थी।
राजीव गांधी को देश में कंप्यूटर क्रांति के लिए याद किया जाता है तो इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी को पोखरण परमाणु विस्फोट के अभियानों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने का लाभ मिला था। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा 2024 के लोकसभा चुनाव में चंद्रयान 3 को मोदी सरकार की उपलब्धि के तौर पर प्रचारित करेगी। उसे इसका राजनीतिक लाभ भी मिल सकता है।