सोनिया गांधी ने दिल्ली में रात्रिभोज के जरिए राजनीति का पारा चढ़ा रखा है तो भाजपा ने लखनऊ में राज्यसभा के चुनाव के जरिए। पार्टी के एक केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि कल सुबह सूरज के उगने के साथ लखनऊ में गोमती नदी के पानी का स्वाद अच्छा हो जाने की पूरी उम्मीद है। लंबे समय तक लखनऊ रहकर भाजपा की राजनीति करने वाले सूत्र का कहना है कि भाजपा उ.प्र. से राज्यसभा की नौ राज्यसभा सीटें जीतने में सफल हो जाएगी।
हालांकि इस मुद्दे पर बसपा के नेता खामोश हैं। पार्टी के वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि उनकी पार्टी ने संयुक्त उम्मीदवार उतारा है। हमारे पास पहले से बहुमत नहीं था। बसपा के केवल 19 विधायक हैं। हमारी उम्मीद
समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के समर्थन पर टिकी है। कभी उ.प्र. में राजनीति का मुख्य केन्द्र रहने वाले कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का कहना है कि इस पर अभी से कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। अब बस कुछ समय की बात है।
वहीं समाजवादी पार्टी के नेता इस बारे में अभी कुछ बोलने से बच रहे हैं। माना यह जा रहा है कि भाजपा ने लखनऊ के जरिए पूरे देश में राजनीति का संदेश देने का मन बनाया है। इसके लिए पार्टी के रणनीतिकार काफी सक्रिय हैं। पार्टी के नौंवे प्रत्याशी को लेकर कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता तंज भी कसा। सूत्र का कहना है कि संभव है, भाजपा गुजरात राज्यसभा चुनाव में तिकड़म से जीतना चाह रही थी, लेकिन अहमद पटेल को नहीं हरा पाई। अब वह यह बदला उ.प्र. में लेने के लिए जोर बना रही हो।
क्या सपा टूटेगी?
संसद के गलियारे में भी यह आशंका आम थी। समाजवादी पार्टी के टूटने के कयास लगाए जा रहे हैं। बताते हैं नरेश अग्रवाल के भाजपा में जाने के बाद इस तरह की संभावनाओं को काफी बल मिल रहा है। माना यह जा रहा है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए टीम अखिलेश अपने विधायकों की अधिक से अधिक संख्या सुनिश्चित करने में लगी है।