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TMC vs BJP: 'मुस्लिम वोटरों पर ममता की नजर, तुष्टिकरण के लिए कर रहीं अब्दुल्ला का समर्थन', भाजपा ने बोला हमला

Tue, 15 Jul 2025 03:11 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके मंत्रियों को नजरबंद किए जाने की आलोचना की। इस टिप्पणी को लेकर भाजपा नेता अमित मालवीय ने ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि बनर्जी मुस्लिम वोटरों पर नजर रखने और तुष्टिकरण की राजनीति करने के लिए अब्दुल्ला का समर्थन कर रही हैं। 
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ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्ला और अमित मालवीय - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पश्चिम बंगाल में भाजपा के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने सोमवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर हमला बोला। उन्होंने मुख्यमंत्री बनर्जी पर 'इस्लामी वोट बैंक' पर नजर रखने के लिए 'डॉग-व्हिसल पॉलिटिक्स' में लिप्त होने का आरोप लगाया। 

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दरअसल, ममता बनर्जी ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके मंत्रियों को नजरबंद किए जाने की आलोचना की। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि यह नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को छीनने जैसा है।

अब्दुल्ला समेत कई विपक्षी नेताओं को किया गया था नजरबंद
उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस व विपक्षी दलों के कई नेताओं को रविवार को कथित तौर पर नजरबंद कर दिया गया था ताकि उन्हें शहीद दिवस मनाने के लिए श्रीनगर के नक्शबंद साहिब कब्रिस्तान जाने से रोका जा सके। हालांकि, सोमवार को अब्दुल्ला कब्रिस्तान के गेट तक पहुंचे और वहां 13 जुलाई 1931 को डोगरा सेना द्वारा मारे गए 22 लोगों को श्रद्धांजलि दी।
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अमित मालवीय ने ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया को लेकर जमकर घेरा
ममता बनर्जी की इस पर प्रतिक्रिया को लेकर भाजपा नेता अमित मालवीय ने उन्हें जमकर घेरा। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी का उमर अब्दुल्ला का समर्थन करना सिर्फ श्रद्धांजलि देने के लिए नहीं था, बल्कि यह मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति और तुष्टिकरण का हिस्सा था। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'यह जानबूझकर तुष्टिकरण, ऐतिहासिक विकृतियों और इस्लामी वोट बैंकों के उद्देश्य से की गई मनमानी राजनीति है।'

1931 की घटना कश्मीर में कट्टरपंथी इस्लामी अलगाववाद की शुरुआत थी: मालवीय
मालवीय ने आरोप लगाया कि 13 जुलाई 1931 को कश्मीर में जो घटना हुई थी, वह राज्य के खिलाफ एक इस्लामी और सांप्रदायिक विद्रोह था, जिसमें निर्दोष हिंदुओं को निशाना बनाया गया। मालवीय ने कहा कि यह घटना कश्मीर में कट्टरपंथी इस्लामी अलगाववाद की शुरुआत थी और अब्दुल्ला परिवार इसे बार-बार शहीद दिवस के रूप में पेश करता रहा है।

झूठे इतिहास को सही साबित करने की कोशिश कर रहीं ममता
अमित मालवीय ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह अब इस झूठे इतिहास को सही साबित करने की कोशिश कर रही हैं, जो 16 अगस्त 1946 में कोलकाता में हुए सांप्रदायिक दंगों की याद दिलाता है। मालवीय ने आरोप लगाया कि अब्दुल्ला के आह्वान को ममता बनर्जी का यह समर्थन स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देने के लिए नहीं है, बल्कि यह इस्लामी अलगाववाद और वोट बैंक की राजनीति को बढ़ावा देने के लिए है, भले ही इसका मतलब ऐतिहासिक जख्मों को कुरेदना ही क्यों न हो। उन्होंने आरोप लगाया, 'अब, वह बंगाल पर भी वैसा ही सभ्यतागत आतंक फैलाना चाहती हैं।'
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टीएमसी नेता जनसंख्या संतुलन बदलने की कोशिश कर रहे
अमित मालवीय ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता पश्चिम बंगाल में मालदा से लेकर मुर्शिदाबाद, बशीरहाट, देगांगा, इटाहार और हावड़ा तक हिंसा और डर का माहौल बनाकर जनसंख्या संतुलन बदलने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'इतिहास सबकुछ याद रखता है। और भारत भी इसे नहीं भूलेगा।'

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