फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gujarat High Court: शौचालय से वर्चुअल सुनवाई में शामिल होने वाले पर एक लाख का जुर्माना; 20 जून को किया था ऐसा

Tue, 15 Jul 2025 02:43 AM IST
शिव शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

 गुजरात हाईकोर्ट ने शौचालय की सीट पर बैठकर अदालत की सुनवाई में शामिल होने के आरोपी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया। व्यक्ति के खिलाफ अदालत की अवमानना का मामला चल रहा था, लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि वह बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार है।

विज्ञापन


जस्टिस एएस सुपेहिया और जस्टिस आरटी वच्छानी की खंडपीठ के समक्ष सोमवार को मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने अपने आदेश कहा, अवमाननाकर्ता समद अब्दुल रहमान शाह ने लाइव-स्ट्रीमिंग कार्यवाही के दौरान अपने आचरण को स्वीकार किया है और कहा है कि वह बिना शर्त माफी मांगने के लिए तैयार है। इस प्रकार, इस स्तर पर, हम अवमाननाकर्ता को अगली सुनवाई की तारीख तक इस अदालत की रजिस्ट्री के समक्ष 1 लाख रुपये की राशि जमा करने का निर्देश देते हैं। अदालत को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, समद 20 जून को कुल 74 मिनट तक सुनवाई में उपस्थित रहा, इस दौरान उसे शौचालय में बैठकर शौच करते देखा गया था।

क्या था मामला
यह घटना 20 जून की है जब जस्टिस नीरज एस देसाई एक मामले की सुनवाई कर रहे थे। उस दौरान पीले रंग की टी-शर्ट पहने एक व्यक्ति ने मोबाइल के माध्यम से लॉग इन किया, स्क्रीन पर उसका नाम समद बैटरी था। शख्स वीडियो लिंक के जरिये कार्यवाही में भाग लेने के दौरान शौचालय की सीट पर बैठा था। इसका वीडियो वायरल हो गया।
विज्ञापन


एक मिनट का वीडियो वायरल
लगभग एक मिनट के वीडियो में दिखाया गया है कि आदमी ने मोबाइल को शौचालय के फर्श पर रखा था और कैमरा उसकी ओर था। उन्होंने शौचालय में अपना काम खत्म करने के बाद फोन उठाया और चले गए। न्यायमूर्ति देसाई ने स्पष्ट रूप से अपने कार्यों या परिवेश पर ध्यान नहीं दिया। वायरलेस इयरफोन पहने हुए उसी व्यक्ति को बाद में लाइवस्ट्रीम में फिर से लॉग इन करते हुए एक कमरे में बैठे और अपनी बारी का इंतजार करते देखा जा सकता है। 10 मिनट बाद न्यायमूर्ति देसाई ने उसका नाम पूछा तो उसने खुद को सूरत के किम गांव निवासी अब्दुल समद और मारपीट मामले में शिकायतकर्ता बताया।

हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान 
इसका वीडियो वायरल होने पर हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना कार्यवाही शुरू की थी। 30 जून को जस्टिस एएस सुपेहिया और आरटी वछानी की डिवीजन बेंच ने आदेश दिया था कि उस व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट की अवमानना का केस दर्ज किया जाए। 3 जुलाई को कोर्ट का मौखिक आदेश वेबसाइट पर अपलोड किया गया। कोर्ट ने कहा, 'ऐसे अनुशासनहीन और अपमानजनक व्यवहार की घटनाएं अब आम हो गई हैं, जिन्हें रोकने के लिए आईटी विभाग को एक तंत्र विकसित करना चाहिए।' कोर्ट ने यह भी कहा कि, 'इस बदनाम करने वाले वीडियो को सोशल मीडिया से तुरंत हटाया जाना चाहिए।'

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें