महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना के बीच सीट बंटवारे के सवाल पर पेच फंसना तय है। भाजपा अपने सहयोगी को 80 से अधिक सीटें देने के मूड में नहीं है। जबकि शिवसेना राज्य विधानसभा की आधी (144) सीटें चाहती हैं। इस बीच कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चुनावी राज्यों हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्रियों की चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए मंगलवार को बुलाई है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक शिवसेना से अलग रह कर बीते विधानसभा चुनाव में 122 सीटें हासिल कर पार्टी ने अपनी ताकत दिखा दी थी। हालिया लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को 23 सीटें मिलीं। शिवसेना को भी पीएम मोदी की छवि का लाभ मिला।
इस बीच राकांपा और कांग्रेस के कई कद्दावर नेता पार्टी से जुड़े हैं। ऐसे में राज्य में हमारी ताकत बहुत बढ़ गई है। ऐसे स्थिति में विधानसभा चुनाव में सीटों का बराबर बंटवारे का सवाल ही नहीं उठता। वैसे भी पार्टी नेतृत्व ने राज्य इकाई को विधानसभा चुनाव फिर से अकेले चुनाव लडने की तैयारी करने का भी निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में भाजपा-शिवसेना गठबंधन को राज्य की 288 में से 226 सीटों पर बढ़त मिली। इन्हें 64 फीसदी सीटों पर भाजपा को बढ़त मिली थी। पार्टी को लोकसभा चुनाव में भी शिवसेना से 4 फीसदी से भी अधिक मत मिले थे। इस बीच पार्टी के आंतरिक सर्वे में अपने दम पर लडने की स्थिति में भी बहुमत हासिल होने का तथ्य सामने आया है। जाहिर तौर पर इस स्थिति में भाजपा नेतृत्व शिवसेना को वहां 80 से अधिक सीटें देने के मूड में नहीं है।