बेहद दिलचस्प है कि राष्ट्रीय राजनीति में दोस्त एआईडीएमके पर विधानसभा चुनावों में भाजपा खासी हमलावर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के बीच दोस्ताना रिश्ते जगजाहिर हैं। इसके बावजूद विधानसभा चुनावों में भाजपा के निशाने पर डीएमके से ज्यादा एआईडीएमके की सरकार है।
तमिलनाडु में शराब की बढ़ती बिक्री, गो पालन घोटाला, बाढ़ के बाद राहत में हुई बदइंतजामी और तमाम सरकारी ठेकों में हुए कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा जोर-शोर से भाजपा अपने चुनाव प्रचार में उठा रही है। भाजपा की रणनीति है कि राज्य में जयललिता सरकार केखिलाफ जो भी सत्ता विरोधी रुझान बन रहा है, उससे जो वोट एआईडीएमके की झोली से खिसक रहे हैं, उन्हें वह अपनी ओर खींच सके। चाहे चेन्नई की टी नगर सीट हो, जहां से भाजपा केराष्ट्रीय सचिव एच. राजा उम्मीदवार हैं या चेन्नई से 70 किलोमीटर दूर तिरुत्तणी विधानसभा क्षेत्र हो, जहां भाजपा उम्मीदवार चक्रवर्ती बेहद आक्रामकता से चुनाव लड़ रहे हैं।
हर जगह भाजपा का ज्यादा हमला एआईडीएमके पर ही दिखाई दिया। चुनाव प्रचार के लिए दिल्ली से पहुंच रहे केंद्रीय मंत्री और पार्टी पदाधिकारी भी एआईडीएमके पर ही निशाना साध रहे हैं। कई महीने से तमिलनाडु में डेरा डाले भाजपा चुनाव प्रभारी महासचिव मुरलीधर राव और उनकी पूरी टीम ने राज्य के विभिन्न इलाकों में घूमने के बाद यह महसूस किया कि अनेक कारणों से लोगों में एक छुपा हुआ सत्ता विरोधी रुझान है।