केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने पश्चिम बंगाल रामपुरहाट के बोगतुई गांव में जले मकानों से रविवार को नमूने के तौर पर कुछ कुदाल और लोहे की रॉड को अपने कब्जे में ले लिया। माना जाता है कि हमलावरों ने वारदात में कथित तौर पर इन वस्तुओं का इस्तेमाल किया था। इस बीच केंद्र सरकार ने सीबीआई अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों के 35 जवानों को तैनात कर दिया है।
सीबीआई की टीम ने इस सिलसिले में रविवार को रामपुरहाट स्थित अस्पताल जाकर घायल लोगों के बयान भी दर्ज किए। उधर, इस घटना की सीबीआई जांच पर राजनीति भी शुरू हो गई है। पश्चिम बंगाल में सत्ताधारी टीएमसी ने रविवार को आरोप लगाया कि भाजपा इस जांच को प्रभावित करना चाहती है।
भाजपा ने सालों पहले गुजरात में हुई हत्याओं को भुला दिया
टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा, भाजपा ने सालों पहले गुजरात में हुई हत्याओं को भुला दिया है। अब वह बंगाल की बोगतुई गांव की घटना पर घड़ियाली आंसू बहा रही है। उन्होंने कहा, पार्टी अभी कुछ दिनों तक ‘इंतजार करेगी और देखेगी’ कि सीबीआई की जांच किस प्रकार आगे बढ़ रही है। उसके बाद आगे की रणनीति पर फैसला करेगी।
उधर, भाजपा प्रवक्ता समिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि रामपुरहाट की घटना के बाद राज्य में सत्ताधारी दल ने अपनी विश्वसनीयता और स्वीकार्यता पूरी तरह खो दी है। दरअसल अज्ञात लोगों ने 21 मार्च को रामपुरहाट के पास बोगतुई गांव के 10 घरों में आग लगाकर कथित तौर पर महिला और बच्चों सहित आठ लोगों को जिंदा जला दिया था।
भयानक रात का सच जानने को अग्निशमन कर्मियों से करेगी बात
सीबीआई अधिकारियों ने कहा कि ग्रामीणों की सूची तैयार की जा रही है ताकि उनसे घटना के बारे में बातचीत की जा सके। उन्होंने प्रशासन से उन लोगों का पता लगाने के लिए भी कहा है, जो गांव छोड़कर चले गए हैं। उस भयानक रात में क्या हुआ था इसको जानने के लिए जांच टीम उन अग्निशमन अधिकारियों से भी बात करेगी।
घटना के पीछे साजिश : ममता
हम (टीएमसी) रामपुरहाट वारदात में शामिल नहीं थे। पार्टी के एक कार्यकर्ता को टीएमसी के ही किसी कार्यकर्ता ने हत्या कर दी थी, लेकिन मीडिया केवल टीएमसी की आलोचना कर रही है। इस घटना के पीछे एक साजिश है। अच्छा है कि सीबीआई ने जांच का जिम्मा लिया है, लेकिन यदि उसने भाजपा के निर्देश का पालन किया तो हम आंदोलन करेंगे।
- ममता बनर्जी, मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल