टीबी संक्रमण की चपेट में आने पर मरीज को मांसपेशियों की हानि होती है, जिसे कैचेक्सिया कहा जाता है। यह मरीज को शारीरिक रूप से दुर्बल बना देता है। उसके शरीर के वजन में गिरावट आ जाती है।
भारतीय वैज्ञानिक टीबी मरीजों में आने वाली दुर्बलता की वजह का समाधान खोजेंगे। जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (बीआईआरएसी) ने ग्रांड चैलेंज इंडिया मिशन के तहत इस अध्ययन का फैसला लिया है।
विज्ञापन
टीबी संक्रमण की चपेट में आने पर मरीज को मांसपेशियों की हानि होती है, जिसे कैचेक्सिया कहा जाता है। यह मरीज को शारीरिक रूप से दुर्बल बना देता है। उसके शरीर के वजन में गिरावट आ जाती है। हालांकि, चिकित्सक टीबी उपचार की दवाओं के साथ उसे पौष्टिक भोजन लेने की सलाह देते हैं ताकि वजन में होने वाली गिरावट को रोका जा सके।
अध्ययन के लिए मांगे आवेदन
अब जैव प्रौद्योगिकी विभाग की ओर से देश के सभी अनुसंधान केंद्रों से कैचेक्सिया टीबी पर समाधान खोजने को लेकर अध्ययन के लिए आवेदन मांगे हैं। विभाग के अनुसार, देश को टीबी संक्रमण से मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार ने 2025 तक का लक्ष्य तय किया है। साथ ही टीबी संक्रमण को लेकर नए वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर चिकित्सा की दिशा तय करना भी आवश्यक है।