प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा, भारत की विकास से जुड़ी आवश्यकताएं बेहद अहम हैं, लेकिन यहां का वन्य जीवन और जैव विविधता भी इतनी समान अनिवार्य हैं। देश में 2 से 8 अक्तूबर तक हर साल मनाए जाने वाले वन्यजीव सप्ताह के उपलक्ष्य में राष्ट्र के नाम अपने संदेश में पीएम मोदी ने कहा, वन्यजीव संरक्षण व संवर्धन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता बेहद मजबूत है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लिखित संदेश में कहा, वन्यजीव संरक्षण हमारे स्वभाव में शामिल है और हमेशा हमारी परंपरा व संस्कृति का अभिन्न अंग रहा है। हमारा महान संविधान भी हर भारतीय के मौलिक कर्तव्यों में से एक के रूप में वन व वन्यजीव संरक्षण को शामिल करते हुए इस दर्शन को संजोए हुए हैं। उन्होंने कहा, विश्व की 2.4 फीसदी भूमि में भारत वैश्विक जनसंख्या के 17 फीसदी लोगों का घर है। देश की विकासात्मक आवश्यकता बेहद ज्यादा हैं। हालांकि हम वन्यजीव और जैव विविधता के संरक्षण को समान अहमियत देने में यकीन करते हैं। उन्होंने कहा कि संरक्षित क्षेत्रों के मजबूत व विस्तारित नेटवर्क के साथ भारत की वन्यजीव संरक्षण की प्रतिबद्धता के शब्द हमेशा जितने ही मजबूत हैं।
पीएम ने कहा, इको-सेंसटिव जोन एक परिधीय सहयोग देते हैं और राष्ट्रीय पार्कों व सेंक्चुरियों के चारों तरफ बफर जोन की तरह काम करते हैं। इस दिशा में महान कदम बढ़ाते हुए ऐसे कुछ जोन को वन्यजीवों के लिए स्थान की उपलब्धता बढ़ाने के नजरिये से अधिसूचित किया गया है। उन्होंने कहा, भारत हमेशा विभिन्न प्रकार की प्रवासी प्रजातियों के लिए एक प्राकृतिक घर रहा है और इसी वजह से इस साल फरवरी में 13 वें प्रवासी प्रजाति संधिपक्ष सम्मेलन में स्वीकार किए गए गांधीनगर घोषणापत्र में ‘2020 के बाद की वैश्विक जैवविविधता के प्रारूप में’ पारिस्थितिकी कनेक्टिविटी की अवधारणा के समेकन पर बल दिया गया है। उन्होंने इस संबंध में एशियाई शेर और बाघ का जिक्र किया।