दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय समूह बिम्सटेक के सदस्य देशों ने गुरुवार को राजधानी नई दिल्ली में बैठक की। इस दौरान आतंकवाद के खतरे सहित विभिन्न सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में सहयोग के तरीकों पर मंथन किया। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसके बारे में जानकारी दी है। गौरतलब है कि बिम्सटेक (बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल) में भारत के अलावा श्रीलंका, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, नेपाल और भूटान शामिल हैं।
विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को कहा कि बैठक में बिम्सटेक क्षेत्र में शामिल सभी देशों के प्रतिनिधियों ने इस क्षेत्र में पारंपरिक और उभरते हुए गैर-पारंपरिक सुरक्षा खतरों पर चर्चा की। इसके अलावा सभी प्रतिभागियों ने क्षेत्र में आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराधों का मुकाबला करने में सहयोग को बढ़ाने के लिए व्यापक मुद्दों पर चर्चा और सुझाव दिए।
विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में बताया कि वार्ता में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध और अवैध मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने में सहयोग पर बिम्सटेक कन्वेंशन के कार्यान्वयन के विभिन्न पहलुओं पर भी विचार-विमर्श किया गया। गौरतलब है कि बिम्सटेक कन्वेंशन 16 मार्च, 2021 को लागू हुआ था।
बैठक के उद्घाटन सत्र को विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) संजय वर्मा ने संबोधित किया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने क्षमता निर्माण, सूचना के आदान-प्रदान, प्रत्यर्पण और कानूनी सहायता के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाकर आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय अपराधों के खतरे का मुकाबला करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।
दक्षिण एशिया क्षेत्रीय समूह बिम्सटेक (BIMSTEC) के ढांचे के तहत सुरक्षा स्तंभ का नेतृत्व भारत कर रहा है। सुरक्षा स्तंभ के तहत भारत आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराध पर बिम्सटेक संयुक्त कार्य समूह का तंत्र छह उप-समूहों के काम की देखरेख करता है।
ये छह उप-समूह खुफिया जानकारी साझा करने, कानूनी और कानून प्रवर्तन, कट्टरता और आतंकवाद का मुकाबला करने, धन शोधन विरोधी और आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने, मानव तस्करी और मादक दवाओं की जांच से संबंधित हैं।