पीठ ने कहा कि हम यह प्रक्रिया इसलिए अपना रहे हैं, ताकि सुनवाई की अगली तारीख पर समय न खराब हो और सुनवाई आगे बढ़ सके। सुनवाई की अगली तारीख 11 जुलाई को नई पीठ गठित किए जाने की संभावना है, क्योंकि पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति जोसेफ 16 जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बिल्कीस बानो के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उनके परिजनों की हत्या के सभी 11 दोषियों की रिहाई के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई 11 जुलाई तक के लिए टाल दी है। पिछले साल इनकी सजा में छूट दी गई थी। न्यायमूर्ति केएम जोसेफ, न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने उन दोषियों को फिर से नोटिस जारी करने का निर्देश दिया, जिन्हें नोटिस तामील नहीं हो सका है।
विज्ञापन
पीठ ने कहा कि हम यह प्रक्रिया इसलिए अपना रहे हैं, ताकि सुनवाई की अगली तारीख पर समय न खराब हो और सुनवाई आगे बढ़ सके। सुनवाई की अगली तारीख 11 जुलाई को नई पीठ गठित किए जाने की संभावना है, क्योंकि पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति जोसेफ 16 जून को सेवानिवृत्त होने वाले हैं। न्यायमूर्ति जोसेफ का अंतिम कार्यदिवस 19 मई होगा। सुप्रीम कोर्ट में 20 मई से दो जुलाई तक ग्रीष्मावकाश है।
शीर्ष कोर्ट ने दो मई को भी मामले की सुनवाई उस वक्त टाल दी थी, जब कुछ दोषियों के वकीलों ने नोटिस तामील न होने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। गुजरात सरकार ने इस मामले के 11 दोषियों को सजा में छूट देते हुए पिछले साल 15 अगस्त को उन्हें जेल से रिहा कर दिया था। दोषियों की रिहाई के खिलाफ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की नेता सुभाषिनी अली, स्वतंत्र पत्रकार रेवती लाल, लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूप रेखा वर्मा और तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने याचिकाएं दायर की हैं।