बिलकिस बानो मामले के प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि ऐसे अपराधियों को रिहा ही नहीं किया जाना चाहिए था। मैंने घटना के दिन अपने लोगों की हत्या होते देखी, जिसे सोचकर मैं आज भी अचानक रात को चिल्लाने लगता हूं।
बिलकिस बानो मामले के प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि दोषियों को फांसी दी जानी चाहिए। साथ ही कहा कि अगर फांसी नहीं दी जाती हो कम से कम ताउम्र उन्हें जेल में रखा जाना चाहिए। मामले के प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि तभी हमें पूरा इंसाफ मिलेगा। गौरतलब है कि 2002 में गोधरा ट्रेन को आग के हवाले करने के बाद भड़के दंगों के दौरान गुजरात के दाहोद जिले के लिमखेडा में बिलकिस बानो और अन्य सदस्यों पर हमला किया गया था, उस वक्त प्रत्यक्षदर्शी सात वर्ष का था। अब उसकी उम्र 28 साल है।
विज्ञापन
मैंने अपने लोगों को हत्या होते देखा है- प्रत्यक्षदर्शी
प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि मैं अपने लोगों को मरते हुए देखा है, जिसका मैंने सदमा आज तक मैं सहन कर रहा हूं। कई बार रात में अचानक जागकर मैं चिल्लाने लगता हूं, क्योंकि आज भी मुझे वो सभी घटना परेशान करती हैं। बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों को गुजरात सरकार ने रिहा कर दिया था, जिसे आठ जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया। इस बात बात करते हुए प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि जब गुजरात सरकार ने दोषियों को रिहा किया तो मुझे बेहद दुख हुआ। जब अदालत ने उनके फैसले को रद्द किया, तब जाकर मुझे शांति मिली। प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि उस घटना में मैंने अपनी मां और बड़ी बहन को खोया है।
ऐसे अपराधियों को रिहा किया ही नहीं जाना चाहिए था- प्रत्यक्षदर्शी
मामले पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे अपराधों में दोषियों को रिहा करने का तो सवाल ही नहीं उठता। गौरतलब है कि 27 फरवरी 2002 को गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद राज्य के कई हिस्सों में दंगे भड़क गए थे। उस दौरान प्रत्यक्षदर्शी को पनाह देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि उग्र भीड़ से बचने के लिए 17 लोगों का समूह जंगल के रास्ते देवगढ़ बारिया शहर की ओर चले गए। जिनमें से 14 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इस दौरान बिलकिस के साथ दुष्कर्म किया गया। उस दौरान प्रत्यक्षदर्शी ने गोधरा के राहत शिविर में समय बिताया। जिसके बाद सामाजिक कार्यकर्ता ने उसका पालन पोषण किया।