फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bihar SIR: बिहार वोटर लिस्ट गहन पुनरीक्षण पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, BSLSA को निर्देश- मतदाताओं की मदद करें

Thu, 09 Oct 2025 04:35 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।

सार

सुप्रीम कोर्ट में आज एक बार फिर बिहार मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (Bihar SIR) के मुद्दे पर सुनवाई हुई। शीर्ष अदालत की पीठ ने बिहार विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) को निर्देश दिया कि वह अंतिम मतदाता सूची से बाहर किए गए मतदाताओं को चुनाव आयोग में अपील दायर करने में सहायता करें। कोर्ट में आज की संक्षिप्त सुनवाई के दौरान और किन बिंदुओं पर जिरह हुई। जानिए इस खबर में
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले चुनाव आयोग की तरफ से कराए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट में आज एक और बार सुनवाई हुई। चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं में खामियों को उजागर करते हुए दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान आज कोर्ट ने बिहार विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) को अहम निर्देश दिए। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को  मतदाताओं की मदद करने को कहा। 

विज्ञापन


समय सीमा तय करने पर अगली तारीख पर सुनवाई के समय विचार
चुनाव आयोग की एसआईआर के दौरान जिन मतदाताओं के नाम कटे हैं, उनकी अपील पर निर्धारित समय सीमा के अंदर फैसला होना चाहिए। याचिकाकर्ताओं की इस अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बिंदु पर अगली तारीख पर सुनवाई के समय विचार किया जाएगा। 

चुनाव आयोग का दावा- NGO ने गलत विवरण दायर किया
दूसरी तरफ चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता एनजीओ ने फर्जी विवरण दायर किया है। आयोग के मुताबिक उस व्यक्ति का विवरण गलत है, जिसका दावा है कि उसका नाम अंतिम मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने 'झूठे विवरण' दायर करने को लेकर चिंता जताई और कहा, 'हमें आश्चर्य है कि ऐसा कोई व्यक्ति मौजूद भी है।'
विज्ञापन


NGO की पैरवी कर रहे वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को दिया ये जवाब
अदालत के समक्ष गलत दावे और विवरण दाखिल किए जाने के सवाल पर एनजीओ की तरफ से पैरवी कर रहे वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया, अंतिम मतदाता सूची से अपना नाम बाहर होने का दावा करने वाले व्यक्ति के विवरण की पुष्टि BSLSA की मदद से की जा सकती है।


ये भी पढ़ें- Bihar Election : जिन पर था JDU का दारोमदार, वही अब ताबूत की अंतिम कील ठोकने को तैयार; पीके ने RCP को किया आगे

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ में सुनवाई

बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (बीएसएलएसए) को निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा, वह अपने जिला-स्तरीय निकाय को अंतिम मतदाता सूची से बाहर किए गए मतदाताओं को चुनाव आयोग में अपील दायर करने में सहायता करे। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर न्यायमूर्ति सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ सुनवाई कर रही है। पीठ ने कहा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अपील दायर करने में मतदाताओं की सहायता के लिए अर्ध-विधिक स्वयंसेवकों की एक सूची जारी करेगा। BSLSA सुनिश्चित करेगा कि उनके पास मतदाताओं के नाम खारिज होने के विस्तृत आदेश हों।

सभी को अपील करने का उचित अवसर देने पर जोर, एक पंक्ति में नहीं हो आदेश
पीठ ने कहा, हम चाहते हैं कि सभी को अपील करने का उचित अवसर दिया जाए और उनके पास इस बारे में विस्तृत आदेश होने चाहिए कि उनके नाम क्यों बाहर किए गए हैं। यह एक पंक्ति का गूढ़ आदेश नहीं होना चाहिए।

बिहार एसआईआर पर राजनीतिक दल माहौल बनाने की ताक में, इसलिए लगा रहे आरोप: चुनाव आयोग
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण(एसआईआर) को लेकर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। ऐसा राजनीतिक दलों की ओर से माहौल बनाने के लिए किया जा रहा है। चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा कि कहा कि उन्हें तीन हलफनामे मिले हैं, जिनकी जांच की गई। इनमें से एक हलफनामा एनजीओ एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) का था। इसमें एक व्यक्ति का विवरण फर्जी था, उसने दावा किया था कि उसका नाम अंतिम मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया है।

कोर्ट को दिखाए जा रहे कागजात हैरान करने वाले: आयोग
द्विवेदी ने बताया कि एडीआर के हलफनामे में जिस व्यक्ति का उल्लेख किया गया है, उसका नाम मसौदा मतदाता में नहीं था और उन्होंने जो विवरण दिया था वह किसी महिला का था। उन्होंने कहा कि जिस तरह से ये कागजात कोर्ट को दिखाए जा रहे हैं, वह हैरान करने वाला है। अब उन्होंने यह कहानी छोड़ दी है कि मुसलमानों समेत बड़ी संख्या में लोगों को बाहर रखा गया था। अब कहानी अलग है। अब वे चाहते हैं कि कोर्ट को किसी और रास्ते पर ले जाया जाए। उन्होंने बताया कि अब तक कोई भी चयनकर्ता यह कहने के लिए आगे नहीं आया है कि उन्हें चुनाव आयोग से यह आदेश नहीं मिला है कि उनके नाम क्यों हटाए गए।

पांच दिन में अपील की समय सीमा खत्म हो जाएगी
दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, हमने सोचा था कि हम उन लोगों की मदद कर पाएंगे जो वास्तव में अंतिम सूची में शामिल होना चाहते हैं। इस पर आयोग के वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि एनजीओ लोगों की मदद नहीं कर रहा है, बल्कि केवल कहानियां गढ़ रहा है और अटकलें लगा रहा है। ऐसा राजनीतिक दलों की ओर से माहौल बनाने के किया किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा, एडीआर अपने हलफनामे में बहुत कुछ कह रहा है। उन्हें कैसे पता कि कितने मुसलमान और अन्य लोग सूची से बाहर हैं? मैं अदालत से आदेश चाहता हूं कि जो लोग अपील करना चाहते हैं, वे ऐसा कर सकें क्योंकि पांच दिनों में यह समय सीमा समाप्त हो जाएगी।

ये भी पढ़ें- Bihar Election 2025: जनसुराज ने जारी की प्रत्याशियों की पहली सूची, 51 उम्मीदवारों में ट्रांसजेंडर को भी मौका
विज्ञापन


कांग्रेस पार्टी ने भी आयोग से तीखे सवाल पूछे
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के बाहर भी बिहार में कराए गए एसआईआर का मुद्दा चर्चा में रहा। कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग से एसआईआर पर तीखे सवाल पूछे। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने पूछा कि क्या एसआईआर के बाद भी मतदाता सूची में लाखों डुप्लीकेट एंट्री बरकरार हैं। उन्होंने लाखों की संख्या में डुप्लीकेट वोटर्स होने की बात कहते हुए आयोग से पारदर्शिता सुनिश्चित करने की अपील की।

ये भी पढ़ें- Bihar SIR: चिदंबरम ने अंतिम मतदाता सूची पर EC से पूछा- क्या एसआईआर के बाद भी 5.2 लाख डुप्लिकेट प्रविष्टियां?

चुनाव आयोग ने एसआईआर को सफल बताया, अंतिम सूची पर अब भी कई सवाल
गौरतलब है कि बिहार में मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद देश के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने इस प्रक्रिया को सफल बताया था। गत सोमवार यानी छह अक्तूबर को प्रेस वार्ता के दौरान सीईसी ज्ञानेश कुमार ने बताया था कि बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर दो चरणों में मतदान कराए जाएंगे। पहले चरण में छह नवंबर और दूसरे चरण में 11 नवंबर को वोट डाले जाएंगे। चुनाव नतीजों की घोषणा 14 नवंबर को होगी। एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 7.23 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं। इस पर सवाल खड़े करने वाले लोगों का कहना है कि जनसंख्या और वयस्क आबादी की तुलना में मतदाता सूची में शामिल नाम काफी कम हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे योगेंद्र यादव का दावा है कि एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद अभी भी कई मतदाताओं के नाम ऐसे हैं जो डुप्लीकेट हैं। घुसपैठिए के मुद्दे पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें