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Cyber Crime: बिहार का नवादा साइबर क्राइम के मामले में कैसे बन रहा दूसरा जामताड़ा, युवाओं को इस तरह मिल रहा ठगी का प्रशिक्षण?

प्रतिभा ज्योति, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Thu, 17 Feb 2022 02:18 PM IST

सार

नवादा साइबर अपराध का नया गढ़ बनता जा रहा है। लगातार लोगों को फोन कर उनके एटीएम कार्ड, पासवर्ड आदि हैक कर उन्हें चूना लगाने का मामला सामने आ रहा है। एटीएम वेरिफिकेशन के नाम पर साइबर क्राइम का शिकार होने वालों में ज्यादातर ग्रामीण इलाकों की महिलाएं हैं।
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cyber crime - फोटो : amar ujala
पिछले कुछ समय से बिहार के नवादा में साइबर अपराध तेजी से बढ़ा है। यह जिला साइबर क्राइम का नया गढ़ बनता जा रहा है। यहां के अपराधियों की गिनती अंतरराज्यीय अपराधियों में होने लगी है। यही कारण है कि औसतन हर महीने यहां दूसरे राज्य की पुलिस साइबर अपराधियों की तलाश में दस्तक देने आने लगी है। पुलिस इन अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है और लोगों को जागरूक बना रही है। जिसका नतीजा यह हुआ कि पकरीबरावां थाना क्षेत्र के थालपोस गांव से नवादा पुलिस की टीम ने कुल 33 साइबर अपराधियों को एक साथ बुधवार को गिरफ्तार किया है। नवादा एसपी डी एस सावलाराम ने पकरीबरावां थाने में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस गिरफ्तारी की जानकारी दी। 

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार अपराधियों के पास से साइबर अपराध से जुड़ी कई सामाग्री मिली है, जिसमें 46 मोबाइल, तीन लैपटॉप,  दो मोटरसाइकिल,  पांच एटीएम कार्ड,  तीन स्टाम्प, मोहर, प्रिंट डेटा और अलग-अलग कंपनियों के कई दस्तावेज शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक गिरोह के कुछ सदस्य अभी फरार हैं। अपराधी दिन दहाड़े फोन से लोगों को फंसाकर ठगी का शिकार बना रहे थे। पुलिस का कहना है कि बिहार में अब तक साइबर अपराधियों के खिलाफ की गई ये सबसे बड़ी कार्रवाई है। इस छापेमारी को लेकर पुलिस ने तीन दिनों तक रेकी की। नवादा एसपी के मुताबिक गिरोह लंबे समय से साइबर अपराध के जरिए ठगी को अंजाम दे रहे थे और उन्होंने काफी पैसा बना लिया है। 
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cyber crime - फोटो : amar ujala
पिछले कुछ समय से बिहार के नवादा में साइबर अपराध तेजी से बढ़ा है। यह जिला साइबर क्राइम का नया गढ़ बनता जा रहा है। यहां के अपराधियों की गिनती अंतरराज्यीय अपराधियों में होने लगी है। यही कारण है कि औसतन हर महीने यहां दूसरे राज्य की पुलिस साइबर अपराधियों की तलाश में दस्तक देने आने लगी है। पुलिस इन अपराधियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है और लोगों को जागरूक बना रही है। जिसका नतीजा यह हुआ कि पकरीबरावां थाना क्षेत्र के थालपोस गांव से नवादा पुलिस की टीम ने कुल 33 साइबर अपराधियों को एक साथ बुधवार को गिरफ्तार किया है। नवादा एसपी डी एस सावलाराम ने पकरीबरावां थाने में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस गिरफ्तारी की जानकारी दी। 

पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार अपराधियों के पास से साइबर अपराध से जुड़ी कई सामाग्री मिली है, जिसमें 46 मोबाइल, तीन लैपटॉप,  दो मोटरसाइकिल,  पांच एटीएम कार्ड,  तीन स्टाम्प, मोहर, प्रिंट डेटा और अलग-अलग कंपनियों के कई दस्तावेज शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक गिरोह के कुछ सदस्य अभी फरार हैं। अपराधी दिन दहाड़े फोन से लोगों को फंसाकर ठगी का शिकार बना रहे थे। पुलिस का कहना है कि बिहार में अब तक साइबर अपराधियों के खिलाफ की गई ये सबसे बड़ी कार्रवाई है। इस छापेमारी को लेकर पुलिस ने तीन दिनों तक रेकी की। नवादा एसपी के मुताबिक गिरोह लंबे समय से साइबर अपराध के जरिए ठगी को अंजाम दे रहे थे और उन्होंने काफी पैसा बना लिया है। 

साइबर अपराध के प्रति लोगों को जागरूक बनाती बिहार पुलिस - फोटो : @nawadapolice
बिहार विधानसभा में भी उठ चुका है मुद्दा
बिहार में बढ़ते साइबर अपराध का मुद्दा विधानसभा में भी उठ चुका है। पूर्णिया सदर के विधायक विजय खेमका ने बीते साल फरवरी में बजट सत्र के दौरान बिहार विधानसभा में यह मुद्दा उठाते हुए कहा था कि अधिकारियों के नाम पर सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाकर पैसे मांगे जा रहे हैं। गरीब लोग साइबर अपराधियों के चक्कर में फंस रहे हैं। इस पर कानूनी नकेल कसने की सख्त जरूरत है। सत्ताधारी और विपक्ष दोनों खेमे के 11 विधायकों ने तब बढ़ते साइबर अपराध का मुद्दा उठाया था।

बिहार में पिछले कुछ समय से साइबर अपराधों में खतरनाक वृद्धि देखी जा रही है। जालसाज लोगों से उनकी गाढ़ी कमाई ठग रहे हैं। इस बात को बिहार के गृह मंत्री श्रवण कुमार ने भी इसी सत्र के दौरान विधानसभा में स्वीकार किया था। आंकड़ों का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि बिहार में 2016 में 309 साइबर अपराध, 2017 में 433, 2018 में 474 और 2019 में 1050 मामले दर्ज किए गए। मंत्री श्रवण कुमार के मुताबिक साइबर क्राइम यूनिट अपराध को रोकने में सक्षम हैं। लोगों को जागरूक करना बेहतर उपाय होगा।

साइबर अपराध की बढ़ती घटनाओं तो देखते हुए बिहार पुलिस लोगों को जागरूक बना रही है और साइबर सेनानी ग्रुप बनाया है। व्हाट्सएप के माध्यम से चलने वाले इस ग्रुप का गठन बिहार में अगस्त 2018 में किया गया था। बिहार में कुल 74 साइबर यूनिट का गठन किया गया है। इन्हें ऑनलाइन और बैंक से संबंधित धोखाधड़ी के मामलों को रोकना है, लेकिन फिर भी लोग ठगे जा रहे हैं।

बिहार मे किस तरह के साइबर अपराध हो रहे?
बिहार में तीन तरह के साइबर अपराध सबसे ज्यादा हो रहे हैं। बैंक और ऑनलाइन से जुड़ी धोखाधड़ी, महिलाओं को ब्लैकमेल करने के नीयत से वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे ऐंठने की और फेसबुक पर फेक आईडी बनाने या अश्लील मैसेज भेजने के जैसे मामले ज्यादा होते हैं।

साइबर क्राइम का फाइल फोटो - फोटो : amar ujala
क्यों नवादा कहलाने लगा दूसरा जामताड़ा
बिहार पुलिस के मुताबिक बिहार में साइबर अपराध के सबसे अधिक मामले नवादा, गया, नालंदा और जमुई जिले में रिकॉर्ड किए गए हैं। यहां से लगातार लोगों को फोन कर उनके एटीएम कार्ड, पासवर्ड आदि हैक कर चूना लगाने का मामला सामने आ रहा है। एटीएम वेरिफिकेशन के नाम पर साइबर क्राइम का शिकार होने वालों में ज्यादातर ग्रामीण इलाकों की महिलाएं हैं। पिछले दो वर्षों में इस जिले में साइबर अपराध से जुड़ी 30 बड़ी घटनाएं सुर्खियों में रहीं। जिन राज्यों के लोगों को यहां के अपराधी शिकार बनाते रहे हैं, इनमें से अधिकांश महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, यूपी, हरियाणा, दिल्ली आदि राज्य शामिल हैं। 

कोरोना काल में बढ़े अपराध
रिपोर्ट्स के मुताबिक कोरोना काल में इस जिले के साइबर अपराधियों ने ठगी की कई घटनाओं को अंजाम दिया। कोरोना काल में ऑक्सीजन सिलेंडर और रेमडेसिविर इंजेक्शन के नाम पर भी जमकर ठगी की गयी। इनमें नवादा के अपराधियों का लिंक दिल्ली की साइबर सेल को मिला है। बताया जाता है कि पुलिस कई बार नवादा आ चुकी है, परंतु अपराधियों का सही लोकेशन नहीं मिल सका। नवादा में बढ़ रहे साइबर अपराध की वजह से ही इसकी तुलना झारखंड के जामताड़ा से होने लगी है जो साइबर अपराध के लिए कुख्यात है।

पटना हाईकोर्ट ने कहा था नहीं बनने देंगे दूसरा जामताड़ा
हालांकि बीते साल अक्तूबर में पटना हाईकोर्ट ने नवादा के एक साइबर ठग की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए तल्ख टिप्पणी की थी और कहा था कि नवादा को दूसरा जामताड़ा नहीं बनने देंगे। शिव कुमार की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संदीप कुमार ने याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था।
 

cyber crime
युवाओं को दिखाया जाता है रातों-रात अमीर बनने का सपना 
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गिरोह से जुड़े लोगों को रातों-रात अमीर होते देख इलाके के युवाओं ने इस धंधे की ओर रुख करना शुरू कर दिया है। गिरोह के सदस्य भी ऐसे युवाओं की तलाश में रहते हैं जो जल्दी अमीर बनना चाहते हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूं तो जिले भर में साइबर अपराध अपने जड़ें जमाने लगी हैं लेकिन नवादा मुख्यालय से दूर वारिसलीगंज का इलाका अपराधियों के लिए मुफीद और सेफ जोन बना हुआ है। वारिसलीगंज, काशीचक, शाहपुर और पकरीबरावां थाना क्षेत्र साइबर अपराधियों की फैक्ट्री कहलाने लगी है, जहां हर रोज नए साइबर अपराधी तैयार किए जा रहे हैं। ये अपराधी पुलिस के लिए लगातार चुनौती बने हुए हैं।

कैसे मिलता है प्रशिक्षण
रिपोर्ट्स के मुताबिक गिरोह के सदस्य ज्यादातर युवाओं को इस धंधे में ले कर आते हैं और उन्हें प्रशिक्षण देते हैं। इन इलाकों में बकायदा अपराधियों के लिए ट्रेनिंग सेंटर खोलने की भी बात  कही जाती है। दूसरे राज्यों से भी लोगों को प्रशिक्षण देने के लिए बुलाया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक खेत और खलिहानों  में इस तरह का प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें फोन कॉल पर बात करने और शिकार को झांसे में लाने के तरीके सिखाए जाते हैं।

बताया जाता है कि ठगी के इस खेल में 60-40 का बंटवारा होता है। कमाई पर 60 फीसदी का हक सरगना का है, जबकि कॉल कर ग्राहकों को फंसाने वाले ठग को 40 फीसदी हिस्सा मिलता है। सरगना कॉल करने वालों को मोबाइल, सिम, ग्राहक का मोबाइल नंबर, बैंक खाता नंबर और अन्य जरूरी दस्तावेज मुहैया कराता है, जिसके जरिए धोखाधड़ी होती है। हालांकि यह बात सरकारी रिकॉर्ड में नहीं है लेकिन बताया जाता है कि इस धंधे से जुड़े लोगों ने जालसाजी कर काफी दौलत कमा लिया है। 

साइबर अपराध के लिए कुख्यात जामताड़ा - फोटो : Amar Ujala
क्या है जामताड़ा की कहानी?
घने जंगलों से घिरे झारखंड का जामताड़ा साइबर अपराधों के लिए देश भर में बदनाम हो चुका है।  देश में साइबर फ्रॉड के ज्यादातर मामलों के तार कहीं न कहीं जामताड़ा से जुड़े होते हैं। कहा जाता है कि यहां के नाबालिग और कम पढ़े-लिखे युवा भी साइबर ठगी के मामले में चुटकियों में बड़े-बड़े आईटी इंजीनियर्स को भी चपत लगा सकते हैं। यूपीआइ पेमेंट, केवाइसी अपग्रेड करने के नाम पर या बैंकों के अलग-अलग फर्जी एप बनाकर ये अपराधी ठगी करते हैं। जामताड़ा जिले के युवक कब से इस अपराध में लिप्त हैं, शुरू में पुलिस विभाग को इसका पता नहीं चला। पुलिस विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक यहां साइबर क्राइम का पहला मामला 2013 में सामने आया था, तब से अब तक देश के कई राज्यों की पुलिस बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां कर चुकी है। 

जामताड़ा के साइबर अपराधियों का नेटवर्क बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश से लेकर कई राज्यों तक फैला हुआ है। यहां के साइबर ठग इतने शातिर कि पुलिस आसानी से उन तक नहीं पहुंच पाती है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां की एक बड़ी युवा आबादी साइबर अपराध की दुनिया में शामिल है। यहां के साइबर ठग जामताड़ा में बैठे-बैठे ही देश भर के लोगों को ठगी का शिकार बना लेते हैं। कहा जाता है कि साइबर अपराध की बदौलत ही झोपड़ियों में रहने वाले कई लोगों ने अकूत संपत्ति बना ली है और अब उनके पास बड़े-बड़े मकान और गाड़ियां हैं। 
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