Bihar Assembly Election News 2020: बिहार विधानसभा चुनाव दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। दो प्रमुख गठबंधन राजग और राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन के बीच सीट बंटवारे की गुत्थी सुलझ नहीं पाई है। दोनों गठबंधन में जगह नहीं बना पाने की नाकामी ने चार नए गठबंधनों यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ), यूनाइटेड डेमोक्रेटिक सेक्युलर एलायंस (यूडीएसए), प्रगतिशील लोकतांत्रिक गठबंधन (पीडीए) और तीसरा मोर्चा को जन्म दिया है। वाम दल भी महागठबंधन में मनमाफिक सीट नहीं मिलने पर वाम मोर्चा बनाने की धमकी दे रहे हैं।
सीटों पर छिड़े विवाद के बीच भाजपा ने लोजपा को 27 सीटें और भविष्य में एमएलसी की दो सीटों का नया प्रस्ताव दिया है। भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह इससे ज्यादा सीटें लोजपा को नहीं देगी। हालांकि, कई ऐसे सवाल हैं, जिसका जवाब फिलहाल नहीं है। मसलन जदयू और भाजपा कितनी-कितनी सीटों पर लड़ेंगी?
राजद की अगुवाई वाले महागठबंधन में भी सीट बंटवारे की गुत्थी नहीं सुलझ रही। राजद के फार्मूले पर कांग्रेस और वाम दलों ने सहमति नहीं दी है। राजद कांग्रेस को अधिकतम 60 और वाम दलों को 20 सीटें देना चाहती है। जबकि कांग्रेस 80 और वाम दल 40 सीटों पर दावा जता रहे हैं। राजद की मुश्किल यह है कि उसे अपने कोटे से वीआईपी और जेएमएम को भी सीटें देनी है। बहरहाल नए फार्मूले पर माथापच्ची जारी है।
राजग और महागठबंधन के इतर चार गठबंधन बनने की वजह विपक्ष में एकता के अभाव के अलावा क्षेत्रीय नेताओं की सियासी महत्वाकांक्षा है। यूडीएसए बनाने वाली एआईएमआईएम और एसएडी, भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के साथ पीडीए बनाने वाले पप्पू यादव, बसपा के साथ तीसरा मोर्चा बनाने वाले आरएलएसपी के मुखिया उपेंद्र कुशवाहा और 16 दलों का यूडीएफ बनाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा महागठबंधन में अधिक से अधिक सीटें चाहते थे। इसकी संभावना कम होने पर इन दलों से जुड़े नेताओं ने पहले दबाव बनाने की कोशिश की। इसमें सफल नहीं होने पर कई गठबंधन बन गए।
पिछले विधानसभा चुनाव में सपा के नेतृत्व में जाप, एनसीपी, समरस समाज पार्टी, एसजेडी ने मोर्चा खड़ा किया था। एआईएमआईएम मुस्लिम बहुल सीमांचल की छह सीटों पर चुनाव लड़ी थी। जबकि छह दलों के साथ वाम दल अलग से मैदान में उतरे थे।
मगर सपा की अगुवाई वाले गठबंध और एआईएमआईएम के करीब करीब सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। वाम दलों में सीपीआई माले को तीन सीटों के अलावा बाकी पांच वाम दलों के हाथ कुछ नहीं आया था।
मोर्चा राजग के विरोध के नाम पर बना है, मगर इसके प्रभावी होने पर नुकसान विपक्षी महागठबंधन को उठाना होगा। सभी मोर्चे मुख्यत: विपक्षी बागी नेताओं का ही जमघट है। इसके अलावा इनका प्रभाव क्षेत्र और प्रभाव वाला वर्ग भी महागठबंधन के प्रभाव और क्षेत्र वाला है।