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सीट का समीकरण: यहां से कर्पूरी ठाकुर और उनके बेटे दोनों विधानसभा पहुंचे, ऐसा है समस्तीपुर सीट का चुनावी इतिहास

Sat, 28 Jun 2025 06:37 AM IST
संध्या इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला

सार

‘सीट का समीकरण’ सीरीज की तेरहवी कड़ी में आज हम आपको समस्तीपुर विधानसभा सीट के बारे में बताएंगे। इस सीट पर सबसे बड़ा चेहरा कर्पूरी ठाकुर के बेटे राम नाथ ठाकुर रहे हैं। यह सीट उनका गढ़ रही थी। 2010 में उन्हें राजद के अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने हरा दिया। 
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बिहार चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में साल के अंत में चुनाव होने हैं। सभी पार्टियां चुनाव की तैयारियों में जुट चुकी हैं। इस चुनावी साल में अमर उजाला अलग-अलग सीरीज के जरिए बिहार की सियासत के बारे में बता रहा है। इसी से जुड़ी ‘सीट का समीकरण’ सीरीज की 13वीं कड़ी में आज समस्तीपुर विधानसभा सीट की बात।
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पहले जानें समस्तीपुर सीट के बारे में

 बिहार के 38 जिलों में से एक समस्तीपुर जिला भी है। यह जिला 4 अनुमंडल और 20 ब्लॉक में बंटा हुआ है। समस्तीपुर जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें कल्याणपुर (एससी), वारिसनगर, समस्तीपुर, उजियारपुर, मोरवा, सरायरंजन, मोहिउद्दीननगर, विभूतिपुर, रोसेरा (एससी), हसनपुर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। आज बात समस्तीपुर विधानसभा सीट की करेंगे। समस्तीपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र समस्तीपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। इस सीट पर सबसे पहले 1952 में यहां से दो विधायक जीते तो 1957 और 1962 में यह सीट समस्तीपुर पूर्व और समस्तीपुर पश्चिम में बंटी। 1967 के चुनावों में समस्तीपुर नाम से सीट फिर अस्तित्व में आई। 

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पहले तीन चुनाव में रहा कांग्रेस का दबदबा

1952 में इस सीट पर पहली बार चुनाव हुए थे, तब इस सीट पर 2 विधायकों को चुना गया था। यहां दोनों कांग्रेस के विधायकों ने जीत दर्ज की थी। कांग्रेस के यदुनंदन सहाय और सुंदर महतो को इस सीट से जीत मिली थी। यदुनंदन सहाय ने सोशलिस्ट पार्टी के राम अवतार शर्मा और सुंदर महतो ने सोशलिस्ट पार्टी के काशी पासवान को हराया था। यदुनंदन सहाय को 15161 और सुंदर महतो को 15022 वोट मिले थे। 

 

1957 में समस्तीपुर दो सीटों में बंट गई समस्तीपुर पश्चिम और समस्तीपुर पूर्व। 1957 के चुनाव में समस्तीपुर पश्चिम से कांग्रेस के जदुनंदन सहाय और समस्तीपुर पूर्व से कांग्रेस के सहदेव महतो ने जीत दर्ज की। जदुनंदन सहाय ने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के चंद्रभान महतो को 996 वोट से हरा दिया। वहीं सहदेव महतो ने निर्दलीय उम्मीदवार रामावतार शर्मा को 9,745 वोट से हराया था। 

 

 1962 चुनाव में  समस्तीपुर पश्चिम से कांग्रेस के तेज नारायण ईश्वर को जीत मिली। समस्तीपुर पूर्व से भी कांग्रेस के उम्मीदवार को ही जीत मिली थी। यहां से 1957 में जीते सहदेव महतो जीते। तेज नारायण ईश्वर ने पीएसपी के संत लाल महतो को 3682 वोट से हराया था। वहीं सहदेव महतो को भावना झा को 11397 वोट से हराया था। 


 

1967: कांग्रेस को मिली पहली हार

1967 में समस्तीपुर सीट फिर से अस्तित्व में आई। इस चुनाव में यहां से संघटा सोशलिस्ट पार्टी के आर.एन. शर्मा को जीत मिली थी। आर.एन. शर्मा ने कांग्रेस के एस.महतो को 3938 वोट से हरा दिया। 1969 में बिहार में फिर से चुनाव हुए। इस बार भी संघटा सोशलिस्ट पार्टी के राजेंद्र नारायण शर्मा  ने जीत दर्ज की। आर.एन. शर्मा ने कांग्रेस के युगल किशोर प्रसाद सिन्हा को 5161 वोट से हरा दिया। 

1972: कांग्रेस की वापसी 

1972 के विधानसभा चुनाव में समस्तीपुर सीट से कांग्रेस (ओ) को जीत मिली। कांग्रेस (ओ) के सहदेव महतो ने कांग्रेस के सूरज चौधरी को 8,759 वोट से हरा दिया। सहदेव महतो दो बार इस सीट से कांग्रेस के टिकट पर विधायक रह चुके थे। 1977 में जनता पार्टी के चंद्रशेखर सिंह को जीत मिली थी। चंद्रशेखर सिंह ने कांग्रेस के रामचन्द्र राय को 13130 वोट से हरा दिया था। इस बार कुल 18 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे।  

1977: पूर्व सीएम कर्पूरी ठाकुर पहुंचे विधानसभा

1980 के विधानसभा चुनाव में भी समस्तीपुर विधानसभा सीट पर जनता पार्टी (सेक्युलर) को जीत मिली थी। इस बार यहां से कर्पूरी ठाकुर यहां से जीते। इससे पहले कर्पूरी ठाकूर 1970-71, 1977-79 तक दो बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके थे। 1980 में उन्होंने इस सीट से कांग्रेस (यू) के चंद्रशेखर वर्मा को 27,159 वोट से हरा दिया था। 

अशोक सिंह की हैट्रिक

1985 में लोकदल के अशोक सिंह को यहां से जीते। अशोक सिंह ने कांग्रेस के जय नारायण राय को 8100 वोट से हरा दिया था। 1990 में फिर से यहां से अशोक सिंह ने ही जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा। सिंह ने कांग्रेस के विशेश्वर राय को 22498 वोट से हरा दिया। 1995 के विधानसभा चुनाव में अशोक सिंह ने जीत की हैट्रिक लगाई। जनता दल के अशोक सिंह ने भारतीय प्रगतिशील पार्टी के शाहिद हुस्न खान को 4,418 वोट से हरा दिया। 


 

2000: राम नाथ ठाकुर को मिली जीत 

राम नाथ ठाकुर जेडीयू में बड़े नेताओं में से एक हैं। उनकी पहचान उनके पिता कर्पूरी ठाकुर से है। जिन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है। रामनाथ ठाकुर बिहार विधान परिषद के सदस्य भी रहे और लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार की सरकार में मंत्री रहे। 2014 में वे राज्यसभा भी पहुंचे। राम नाथ ठाकुर समस्तीपुर सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं। 2000 के बाद फरवरी 2005 और अक्तूबर 2005 के चुनाव में भी उन्हें जीत मिली थी।  

2000 में वे जदयू के टिकट पर जीते। उन्होंने तत्कालीन विधायक अशोक सिंह को हराया था। जदयू के राम नाथ ठाकुर ने राजद के अशोक सिंह ने 11,282 वोट से हरा दिया था। 2005 में बिहार में दो बार चुनाव करवाने पड़े थे। पहले चुनाव फरवरी में और दूसरे चुनाव अक्तूबर में हुए थे। दोनों ही चुनावों में राम नाथ ठाकुर को जीत मिली थी। 2005 फरवरी में जदयू के राम नाथ ठाकुर ने राजद के शाहिद अहमद को 23,237 वोट से मात दी थी। अक्तूबर 2005 के चुनाव में भी जदयू के राम नाथ ठाकुर को ही जीत मिली थी। टक्कर एक बार फिर से जदयू और राजद के बीच ही थी। जदयू के रामनाथ ठाकुर ने राजद के निज़ाम अहमद को 13,182 वोट से हरा दिया था। 

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2010: अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने राजद को दिलाई जीत

2010 से इस सीट पर राजद का कब्जा है और तीन बार से लगातार राजद इस सीट पर जीत रही है। 2010 में यहां से अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने जदयू के रामनाथ ठाकुर को हरा दिया। शाहीन 1,827 वोट से जीते। 2015 में राजद के अख्तरुल इस्लाम शाहीन को फिर से जीत मिली। उन्होंने इस बार भाजपा की रेनू कुमार को 31,080 वोट से हरा दिया।  2020 में अख्तरुल इस्लाम शाहीन ने समस्तीपुर सीट से जीत की हैट्रिक लगाई। राजद के शाहीन ने जदयू की अश्वमेध देवी  4,714 वोट से हरा दिया था।



 
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