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दुर्लभ नजारा: आसमान में चार नवंबर की रात दिखेगा साल का सबसे बड़ा और चमकीला सुपरमून, रोशनी में दिखेंगे साये भी

Sun, 02 Nov 2025 07:31 AM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आने वाले चार नवंबर को आसमान में दिखेगा साल का सबसे बड़ा और चमकीला सुपरमून, जिसे बीवर मून भी कहा जाता है। यह चंद्रमा पृथ्वी के सामान्य दूरी से करीब 17,000 मील नजदीक होगा, जिससे यह करीब 7% बड़ा और 16% ज्यादा चमकीला नजर आएगा। इसकी तेज रोशनी में धरती पर हल्की परछाइयां तक दिखेंगी, जो पतझड़ की रात को और उजला बना देंगी।

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सुपरमून - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चार नवंबर को चंद्रमा अपनी सबसे चमकीली और बड़ी झलक दिखाने वाला है। इसकी रोशनी इतनी तेज होगी कि जमीन पर हल्के साये तक दिखेंगे। ऐसा नजारा बहुत शक्तिशाली सुपरमून के वक्त ही देखने को मिलता है। इससे पहले ऐसा नजारा अगस्त 2024 में चीन के चेंगदू के लोंगक्वान पर्वत पर देखा गया था, लेकिन इस बार चांद पृथ्वी के और भी करीब होगा और ठंडी पतझड़ की रात को और ज्यादा दमकेगा। चार नवंबर की रात को साल की सबसे उजली रात बनाने वाला यह सुपरमून साल 2025 के आखिरी महीनों में आने वाले तीन लगातार सुपरमून में से दूसरा होगा।

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कभी-कभी इसे बीवर मून भी कहा जाता है। इस पूर्णिमा का यह नाम उत्तरी अमेरिका की स्थानीय जनजातियों से आया है। यह ऐसे मौसम का संकेत है, जब बीवर (जलचूहे) अपनी सर्दियों की मांद बनाते हैं और शिकारी नदी जमने से पहले जाल लगाते थे। इस दिन के चंद्रमा का आकार नग्न आंखों से देखने पर सूक्ष्म लग सकता है, लेकिन इसकी रोशनी बेहद तेज होगी। इतनी चमकदार कि धुंधली परछाईं बनेगी और ये पूरी रात को जगमगा देगी।

यह सुपरमून है बेहद खास
इस हफ्ते के पूर्णिमा का चंद्रमा न सिर्फ नजदीक होगा बल्कि यह औसत दूरी से लगभग 17,000 मील अधिक नजदीक से पृथ्वी की परिक्रमा करेगा। इस वजह से यह सामान्य पूर्णिमा के मुकाबले लगभग सात फीसदी बड़ा और 16 फीसदी तक अधिक चमकीला दिखाई देगा। सुपरमून तब होता है जब चंद्रमा अपनी पूर्ण कला (पूर्णिमा) पर पहुंचता है और पृथ्वी के चारों ओर अपनी अण्डाकार कक्षा के सबसे निकटतम बिंदु पेरिजी के पास होता है। वैज्ञानिक भाषा में इसे पेरिजी फुल मून कहा जाता है, लेकिन हर सुपरमून एक जैसा नहीं होता।
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तारों से भरा रहेगा आसमान
पूरी रात चंद्रमा चमकीले राशिचक्रीय तारामंडल वृषभ (बैल) नक्षत्र में रहेगा। इससे इसकी तेज रोशनी पास के तारों को छिपा देगी, लेकिन चांद को दूरबीन से देखने पर एल्डेबारन नाम का नारंगी-लाल तारा दिख सकता है। यह पृथ्वी से 65 प्रकाश-वर्ष दूर है और यह बैल की आंख का प्रतीक है। चांद और एल्डेबारन के बीच में है प्लीएड्स या सप्तऋषि जैसा दिखने वाला सात बहनों का झिलमिलाता तारा समूह, जो पृथ्वी से 330 प्रकाश-वर्ष दूर है। इन तीनों चांद एल्डेबारन और प्लीएड्स से बना यह त्रिकोण आसमान में रातभर दिखेगा, जो हमें याद दिलाता है कि कैसे ब्रह्मांड की लय और विज्ञान हम सबको जोड़ते हैं।  

ऐसे देखें सुपरमून
इस सुपरमून के खूबसूरत नजारे को देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं है बस आसमान की तरफ देखना ही काफी होगा, हालांकि चंद्रमा आधिकारिक तौर पर पांच नवंबर को 13:19 यूटीसी यानी भारतीय समयानुसार शाम 6:49 बजे अपनी पूरी कला में पहुंचेगा, लेकिन इसे देखने का सबसे जादुई समय चंद्रमा के पूर्वी क्षितिज से ऊपर उठने के ठीक बाद का पहला घंटा होता है। इस दौरान एक ऑप्टिकल भ्रम होता है जिसे मून इल्यूजन (भ्रम) कहा जाता है, जब चांद पेड़ों या इमारतों के पास दिखता है तो दिमाग उसे बड़ा समझता है।

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