दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरी महाराष्ट्र के रत्नागिरी में होगी। सरकारी तेल विपणन कंपनियों द्वारा विकसित की जा रही देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी परियोजना रत्नागिरी रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (आरआरपीसीएल) में सउदी अरैमको की भी 50 फीसदी की हिस्सेदारी होगी। इसके लिए बुधवार को यहां दोनों पक्षों के बीच एक सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए।
इस अवसर पर केन्द्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी उपस्थित थे। प्रधान ने कहा कि आरआरपीसीएल में अब भारतीय कंपनियों के कंसोर्टियम और सउदी अरैमको, दोनों की पचास-पचास फीसदी की हिस्सेदारी होगी। करीब तीन लाख करोड़ रुपये के निवेश से तैयार हो रही इस परियोजना को जब कार्यरूप दिया जा रहा था, तब इसमें इंडियन ऑयल की 50 फीसदी की जबकि बीपीसीएल और एचपीसीएल की 25-25 फीसदी की हिस्सेदारी थी।
इस परियोजना के तैयार हो जाने पर हर रोज 12 लाख बैरल कच्चे तेल का शोधन हो पाएगा। यदि इसे वार्षिक आधार पर देखें तो हर साल में छह करोड़ टन कच्चे तेल का शोधन होगा। परियोजना के शुरू हो जाने पर यह एक ही स्थान पर चलने वाला दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनरी कंप्लेक्स बन जाएगा।
साझेदारी हर क्षेत्र में
पेट्रोलियम मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि यह साझेदारी सिर्फ पूंजी निवेश की नहीं होगी बल्कि इसके जरिये कच्चे तेल की निर्बाध आपूर्ति, संसाधन, तकनीक और विशेषज्ञता आदि की भी साझेदारी होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस परियोजना के शुरू हो जाने के बाद रत्नागिरी रिफाइनरी का नाम दुनिया के बेहतरीन तेल शोधक कारखानों में होगा और इसकी परिचालन लागत सबसे कम होगी।
विदेशी हिस्सेदारी पर सरकार को आपत्ति नहीं
प्रधान ने इसी पखवाड़े की शुरुआत में बताया था कि रत्नागिरि रिफाइनरी में सऊदी अरब की तेल कंपनी अरैमको की नियंत्रक हिस्सेदारी की इच्छा पर सरकार को कोई ऐतराज नहीं है। प्रधान ने उस अवसर पर कहा था कि यह एक व्यावसायिक परियोजना है और सरकार ने उन्हें नियंत्रक हिस्सेदारी देने का रास्ता खुला रखा है।