केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हज किराए में वृद्धि पर स्पष्टीकरण दिया है। मंत्री ने बताया कि ईरान-अमेरिका-इस्राइल युद्ध के बाद एयरलाइंस ने 400 डॉलर की बढ़ाने को कहा था। मंत्रालय के अधिकारियों ने बातचीत कर इसे 100 डॉलर तक किया है। वहीं, निजी ऑपरेटरों के लिए यह बढ़ोतरी 150 डॉलर है।
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने हज यात्रा के किराए में बढ़ोतरी को लेकर साफ-साफ जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि हाल ही में ईरान और इस्राइल से जुड़े युद्ध जैसे हालात और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण एयरलाइंस कंपनियों ने हज यात्रियों के हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी की मांग की थी।
एयरलाइंस ने क्या रखा था प्रस्ताव?
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, एयरलाइंस ने किराया लगभग 400 डॉलर (करीब 38 हजार रुपये) तक बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। अगर यह बढ़ोतरी पूरी तरह लागू हो जाती, तो आम और गरीब मुस्लिम यात्रियों के लिए हज पर जाना काफी मुश्किल हो जाता। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने तुरंत कदम उठाया। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने एयरलाइंस कंपनियों के साथ कई दौर की बातचीत की। इस बातचीत का मकसद यही था कि हज यात्रा ज्यादा महंगी न हो और ज्यादा से ज्यादा लोग इस पवित्र यात्रा पर जा सकें।
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अब कितना बढ़ा किराया?
सरकार की बातचीत के बाद हज यात्रियों को बड़ी राहत मिली। 400 डॉलर की प्रस्तावित बढ़ोतरी को घटाकर सिर्फ 100 डॉलर (करीब साढ़े नौ हजार रुपये) कर दिया गया। इसका मतलब यह है कि जो लोग भारत की हज समिति के माध्यम से हज पर जाएंगे, उनके किराए में केवल 100 डॉलर की बढ़ोतरी होगी। वहीं, जो यात्री प्राइवेट टूर ऑपरेटर के जरिए हज यात्रा करेंगे, उनके लिए यह बढ़ोतरी 150 डॉलर (14 हजार से ज्यादा रुपये) तक होगी।
केंद्रीय मंत्री ने बताई सरकार की प्राथमिकता
मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी बिना ज्यादा बोझ के हज यात्रा कर सकें। इसलिए हर संभव कोशिश की गई है कि किराया कम से कम बढ़े। कुल मिलाकर, सरकार और एयरलाइंस के बीच हुई बातचीत से हज यात्रियों को बड़ी राहत मिली है और अब पहले के मुकाबले कम बढ़ोतरी के साथ लोग हज यात्रा कर सकेंगे।