जापानी पीएम शिंजो अबे भारत दौरे पर दोनों देशों के बीच अहम रक्षा भागीदारी पर चर्चा होगी। इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव व चुनौती को देखते हुए दोनों देश अपने रक्षा सहयोग को बढ़ावा देंगे।
इसके तहत भारत-जापान सालाना शिखर सम्मेलन के मौके पर रक्षा खरीद समझौते में जापान से यूएस-2 एंफिबियस विमान का सौदा हो सकता है। इस बात के संकेत हैं कि मोदी अबे बातचीत के बाद दिए जाने संयुक्त वक्तव्य में रक्षा सहयोग के बारे में कुछ बातें हो सकती हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि दोनों देशों के बीच परमाणु सेक्टर के गैर-ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा हो सकती है। देश में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए उपकरण खरीदने के लिए जापानी कंपनियों से चर्चा हो सकती है।
इससे पहले इस संबंध में फ्रांसीसी कंपनी ईडीएफ और अमेरिकी कंपनी वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रोनिक्स कंपनी से बातचीत चल रही है।
भारत जापान वार्षिक बैठक ऐसे समय में हो रही है, जबकि उत्तर कोरिया द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण और दक्षिण चीन सागर पर चीन के बढ़ते दावे के चलते क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।
मोदी और अबे इस मुद्दे पर विचार कर सकते हैं। अबे की यात्रा से पहले भारत जापान रक्षा मंत्री स्तरीय वार्षिक वार्ता टोक्यो में हो चुकी है। इसमें सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन, दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी और यूएस-2 शिनमायवा विमान खरीदने के नई दिल्ली के प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी।
रक्षा बातचीत के साथ दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत हुए थे कि मानव रहित जमीन पर चलने वाले वाहनों एवं रोबोट के क्षेत्र में अनुसंधान समन्वय के लिए तकनीकी विचार विमर्श शुरू किया जाए।
मोदी एवं अबे के बीच परमाणु ऊर्जा के बारे में सहयोग के मुद्दे पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। जुलाई में भारत एवं जापान के बीच ऐतिहासिक असैन्य परमाणु करार लागू हुआ था जिसके तहत इस क्षेत्र में दोनों देशों के उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने का प्रावधान है।