ओडिशा में महिलाओं और लड़कियों की तरफ से खुद को आग लगाने की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। पिछले एक महीने में इस तरह की कुछ छह घटनाएं सामने आई हैं।
इन घटनाओं ने राज्य में महिलाओं की मानसिक स्थिति, सुरक्षा और सामाजिक दबाव को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है।
ओडिशा के पुरी जिले में एक 37 वर्षीय महिला ने कथित तौर पर कर्ज के बोझ से तंग आकर खुद को आग लगा ली। यह राज्य में पिछले एक महीने में महिलाओं और लड़कियों की तरफ से खुद को आग लगाने की छठी घटना है। बता दें कि बुधवार को पिपिली कस्बे में किराए के मकान में महिला ने यह कदम तब उठाया जब उसका पति और बेटी घर पर नहीं थे। पुलिस के अनुसार, महिला को गंभीर हालत में पहले पिपिली अस्पताल और फिर एम्स भुवनेश्वर भेजा गया, जहां वह 70 से 80 फीसदी तक जल चुकी हैं।
पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट किया बरामद
मामले में पुरी के एडिशनल एसपी सचिन पटेल ने बताया कि घटनास्थल से केरोसिन की बोतल, माचिस और एक सुसाइड नोट बरामद किया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि महिला कर्ज के कारण परेशान थी, लेकिन नोट में किसी को दोषी नहीं ठहराया गया।
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राज्य महिला आयोग की सदस्य ने की पीड़िता से भेंट
राज्य महिला आयोग की सदस्य उर्मिला महापात्रा ने गुरुवार को अस्पताल जाकर महिला का बयान लेने की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत गंभीर होने के कारण यह संभव नहीं हो सका। परिवार ने भी बताया कि किसी तरह का पारिवारिक विवाद नहीं था।
12 जुलाई, बालासोर- एक छात्रा ने कॉलेज में खुद को आग लगाई, शिक्षक पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। दो दिन बाद इलाज के दौरान उसकी मौत हुई।
19 जुलाई, पुरी- 15 वर्षीय लड़की आग से झुलसी, 2 अगस्त को मौत। शुरुआत में परिवार ने हमले का आरोप लगाया, लेकिन पुलिस ने बाहरी किसी की संलिप्तता से इनकार किया।
6 अगस्त, केंद्रापाड़ा- एक कॉलेज छात्रा ने पूर्व प्रेमी की तरफ से ब्लैकमेल से परेशान होकर आत्मदाह किया, उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
12 अगस्त, बरगढ़- 13 वर्षीय स्कूली छात्रा ने खुद को आग लगाई, उसी दिन मौत।
13 अगस्त, ढेंकानाल- पारिवारिक विवाद के बाद महिला ने लगाई खुद को आग, इलाज जारी।