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ठेला लगाकर कमाते थे रोजी रोटी, बीएचयू ने बना दिया लखपति

Mon, 21 Mar 2016 05:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
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दिलीप सिंह - फोटो : अमर उजाला
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कभी ठेलिया लगाकर जीवन यापन करने वाले सासाराम (बिहार) के दिलीप सिंह आज लखपति ही नहीं, उन्नतिशील किसानों में शुमार हैं। टमाटर, मक्का, मटर, शिमला मिर्च की खेती के बाद अब उन्होंने टमाटर चेरी की पैदावार के जरिये एक नई पहचान बनाई है।
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रविवार को टमाटर चेरी की उपज दिखाने के लिए वह बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आरपी सिंह के पास पहुंचे थे। बीएचयू के कृषि विज्ञान संस्थान से ही दिलीप को टमाटर चेरी की खेती की जानकारी मिली थी। दिलीप को कभी बीएचयू के कृषि विज्ञानियों ने ही ठेले पर सब्जी बेचने के बजाय खेती-किसानी करने के लिए प्रोत्साहित किया था।

रेहन पर खेत लेकर खेती की शुरुआत करने वाले दिलीप अब दूसरों को भी रोजगार मुहैया करा रहे हैं। साथ ही, उन्नतिशील खेती के क्षेत्र में बिहार ही नहीं बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन गए हैं। दिलीप ने बताया कि फिलहाल उनका फोकस टमाटर चेरी की उपज पर है। बीएचयू के कृषि विज्ञानियों की सलाह पर उन्होंने बंगलूरू की नो यू सीड्स कंपनी से 126 रुपये में इसका दो ग्राम बीज मंगाया था।
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ग्रीन हाउस में 50 पौधे जनवरी में लगाए थे। अब पेड़ से फल आने लगे हैं। टमाटर चेरी अंगूर के आकार का संतरे के रंग जैसा होता है। बाजार में इसकी कीमत 150 से 200 रुपये किलो है जबकि बड़े होटलों में 250 से 300 रुपये प्रतिकिलो तक इसकी बिक्री होती है। दिलीप के खेती की खासियत यह है कि वे रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग बिल्कुल नहीं करते।

जैविक खाद से सब्जियों का उत्पादन करते हैं। उन्होंने बताया कि टमाटर चेरी के एक पौधे से 20 से 25 किलो फल निकलता है। बताया कि  पौधा नाजुक होता है, ऐसे में ग्रीन हाउस में ही अच्छी पैदावार होती है। खेतों में यह फसल कमजोर और पैदावार काफी कम होती है। बीएचयू के कृषि विज्ञानी अब इस प्रजाति पर शोध करेंगे ताकि इसे सामान्य तौर पर खेतों में भी पैदा किया जा सके।
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दिलीप को मिल चुके हैं कई अवार्ड

टमाटर - फोटो : getty images
दिलीप को जैविक खेती के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई अवार्ड भी मिल चुके हैं। बीएचयू में भी समय-समय पर आयोजित होने वाली किसान संगोष्ठियों में वे अपने अनुभवों को साझा करते हैं। किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित करते हैं।

टमाटर चेरी विटामिन-प्रोटीन से भरपूर

कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आरपी सिंह ने बताया कि  टमाटर चेरी विटामिन और प्रोटीन से भरपूर होती है। इसमें विटामिन ए, सी और बी कांपलेक्स के साथ ही प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके सेवन से रंतौधी, त्वचा संबंधी बीमारियां नहीं होतीं। टमाटर चेरी के नियमित सेवन से कैंसर की आशंका भी काफी कम हो जाती है। खाने में भी काफी स्वादिष्ट होता है। इसमें कसैला और खट्टापन नहीं होता है।

ग्रीन हाउस या पाली हाउस में खेती

जंगली टमाटर और सामान्य टमाटर के साथ क्रास कराकर इस नई प्रजाति को विकसित किया गया है। इसके लिए 20-30 सेंटीग्रेड तापमान की जरूरत होती है। ऐसे में ग्रीन हाउस या पाली हाउस में ही इसका उत्पादन होता है। किसानों को अभी इसके बारे में जानकारी बहुत कम है। बिहार में पहली बार दिलीप ने इसकी खेती शुरू की है।
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