लोकसभा में भाजपा की सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने खूब 'आनाकानी' दिखाई। बुधवार को प्रज्ञा के लोकसभा में बयान को लेकर विपक्ष ने भी शुक्रवार को खूब दबाव बनाया। प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने पहली बार माफी मांगी, तो विपक्ष संतुष्ठ नहीं हुआ। बिना शब्दों के हेर-फेर के प्रज्ञा से सीधे शब्दों में मांफी मांगने पर अड़ गया। लोकसभा में राजनीतिक गतिरोध को देखकर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को आगे आना पड़ा।
सभी दलों के नेताओं के साथ उन्होंने बैठक करके रास्ता निकाला और दूसरी बार प्रज्ञा सिंह ठाकुर से सीधे शब्दों में माफी मंगवाई। तब कहीं जाकर मामला शांत हुआ।
पहली बार तो शब्दों का जाल बुन गई प्रज्ञा
विपक्ष के हंगामे के बाद जब प्रज्ञा सिंह ठाकुर पहली बार मांफी मांगने के लिए खड़ी हुईं, तो उन्होंने कहा कि उनकी बुधवार की टिप्पणी से यदि किसी को किसी प्रकार की ठेस पहुंची हैं तो वह खेद प्रकट करके क्षमा चाहती हैं। लेकिन इसके साथ प्रज्ञा ने आगे कहा कि उनकी इस टिप्पणी को काफी तोड़ मरोड़कर गलत ढंग से पेश किया गया। प्रज्ञा ने कहा कि जिस तरह से उनके बयानों को तोड़ा-मरोड़ा गया,वह निंदनीय है। प्रज्ञा के इतना कहते ही विपक्ष फिर हमलावर हो गया।
वह प्रज्ञा ठाकुर से सीधे शब्दों में बिना किसी इधर-उधर के माफी मांगने पर अड़ गया। हालात को बिगड़ता देखकर लोकसभा अध्यक्ष सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।