अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में एक रसायन फैक्टरी से लीक हुए स्टाइरीन गैस के स्वास्थ्य पर दीर्घकालिक प्रभाव की संभावना कम है। इस गैस से होने वाली बीमारी भी हर मामले में घातक नहीं है।
गुलेरिया ने कहा, यह पुराने रोग की बजाय तेजी से असर डालने वाला हादसा है, हालांकि, हमें इस पर नजर रखनी होगी। फिलहाल, आंकडे़ किसी दीर्घकालिक प्रभाव की ओर संकेत नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, आंखों को पानी से धोना जरूरी है। त्वचा को पोंछने के लिए टिशू पेपर या तौलिये का इस्तेमाल किया जा सकता है। सांस लेने में परेशानी का सामना करने वाले लोगों की निगरानी करनी होगी क्योंकि यह गैस फेफड़ा और मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है। इनमें से कुछ रोगियों को वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत पड़ेगी।