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भीमा कोरेगांव हिंसा: देशभर में छापे, नक्सली समर्थक कवि वरवरा राव समेत पांच गिरफ्तार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Shilpa Thakur Updated Wed, 29 Aug 2018 01:45 AM IST
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महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पुणे पुलिस ने मंगलवार को देश भर में कई नक्सल समर्थकों के आवास पर छापे मारे और माओवादी समर्थक वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, बरनोन गोंजालविस और गौतम नवलखा को गिरफ्तार कर लिया। 

नवलखा को बुधवार तक राजधानी से बाहर नहीं ले जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें घर में ही नजरबंद रखा गया है। पुलिस ने मंगलवार को हैदराबाद में कवि वरवरा राव, फरीदाबाद व छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन की कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, दिल्ली में गौतम नवलखा, ठाणे में अरुण फरेरा और मुंबई में बरनोन गोंजालविस के आवासों पर छापे मारे। गोवा में सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबडे के घर की तलाशी ली गई। 



रांची में स्टॉन स्वामी के यहां भी छापेमारी की गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सभी पर यलगार परिषद से संबंध और नक्सलियों के समर्थक होने का संदेह है। 

पुलिस ने बताया कि नक्सलियों से संपर्क और जून में गिरफ्तार पांच लोगों से संबंध रखने वालों के घरों पर छापे मारे गए। संदिग्धों के वित्तीय लेनदेन और संचार के तरीकों की छानबीन भी की जा रही है। सभी आरोपियों पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं और यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में पुणे पुलिस ने मंगलवार को देश भर में कई नक्सल समर्थकों के आवास पर छापे मारे और माओवादी समर्थक वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, अरुण फरेरा, बरनोन गोंजालविस और गौतम नवलखा को गिरफ्तार कर लिया। 

नवलखा को बुधवार तक राजधानी से बाहर नहीं ले जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें घर में ही नजरबंद रखा गया है। पुलिस ने मंगलवार को हैदराबाद में कवि वरवरा राव, फरीदाबाद व छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियन की कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज, दिल्ली में गौतम नवलखा, ठाणे में अरुण फरेरा और मुंबई में बरनोन गोंजालविस के आवासों पर छापे मारे। गोवा में सामाजिक कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबडे के घर की तलाशी ली गई। 

रांची में स्टॉन स्वामी के यहां भी छापेमारी की गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि सभी पर यलगार परिषद से संबंध और नक्सलियों के समर्थक होने का संदेह है। 

पुलिस ने बताया कि नक्सलियों से संपर्क और जून में गिरफ्तार पांच लोगों से संबंध रखने वालों के घरों पर छापे मारे गए। संदिग्धों के वित्तीय लेनदेन और संचार के तरीकों की छानबीन भी की जा रही है। सभी आरोपियों पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं और यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मोदी की हत्या की साजिश के पत्र में था वरवरा का नाम

पुलिस ने इस मामले में जून, 2018 में गिरफ्तार पांच लोगों में एक के ठिकाने से पीएम नरेंद्र मोदी की हत्या की साजिश से जुड़ा एक पत्र जब्त किया था। इसमें पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की ही तरह मोदी को भी निशाना बनाने की बात कही गई थी। इस पत्र से ही वरवरा राव का नाम सामने आया था। 

सुधा को साथ ले गई पुलिस

फरीदाबाद के सूरजकुंड स्थित इरोज गार्डन स्थित आवास से गिरफ्तार सुधा भारद्वाज को पुलिस ने मंगलवार शाम जिला अदालत में पेश किया। जहां से महाराष्ट्र पुलिस उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर साथ ले गई। सुधा नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। 

पूर्व अधिकारी ने कहा था, हिंसा में नहीं है माओवादी लिंक

पुणे पुलिस के तत्कालीन संयुक्त आयुक्त रवींद्र कदम ने 2 अगस्त, 2018 को कहा था कि भीमा कोरेगांव हिंसा में माओवादी लिंक नहीं पाया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि सरकार की नीतियों का विरोध करने के लिए माओवादियों द्वारा गठित एक ‘एंटी फासिस्ट फ्रंट’ यलगार परिषद आयोजन के पीछे था। 

जून में पांच लोगों को किया गया था गिरफ्तार

जून में सुधीर धावले को मुंबई से, सुरेंद्र गाडलिंग, महेश राउत व शोमा सेन को नागपुर से और रोना विल्सन को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया था। पुणे के विश्रामबाग थाने में दर्ज मामले के मुताबिक, भीमा कोरेगांव युद्ध की 200वीं वर्षगांठ पर 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में यलगार परिषद ने आयोजन किया था। आरोप है कि इन पांचों के भाषण के बाद हिंसा भड़की थी। इसमें एक व्यक्ति की मौत के बाद हिंसा और भड़क गई थी। 

‘लोगों का समर्थन खोने से घबराई केंद्र सरकार वकीलों, कवियों, दलित अधिकार कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों को गिरफ्तार कर रही है। वहीं, भीड़ हिंसा में शामिल और दिनदहाड़े हत्या करने वाले आजाद घूम रहे हैं। हत्यारों को सम्मानित किया जा रहा है। न्याय के आवाज उठाने वालों को अपराधी बताया जा रहा है।’ अरुंधति राय, लेखक

‘यह आपातकाल की स्पष्ट घोषणा है। लोगों के अधिकारों के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को गिरफ्तार किया जा रहा है।’ 
- प्रशांत भूषण, वकील
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