सुप्रीम कोर्ट ने एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में वकील-कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज को जमानत देने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की याचिका को मंगलवार को खारिज कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट के डिफॉल्ट जमानत देने के फैसले पर मुहर लगाते हुए कहा कि इस मामले में दखल देने की कोई वजह दिखाई नहीं देती। लिहाजा एनआईए की ये याचिका खारिज की जाती है। जस्टिस यू यू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने एनआईए द्वारा दी गई दलीलों पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा, हमें हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई नजर नहीं आता।
बता दें कि हाईकोर्ट के एक दिसंबर के आदेश के खिलाफ एनआईए ने शीर्ष अदालत का रुख किया था। भारद्वाज को अगस्त 2018 में गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून के प्रावधानों के तहत एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में गिरफ्तार किया गया था। दरअसल, 2018 भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद जाति हिंसा मामले में जेल में बंद सुधा को बॉम्बे हाईकोर्ट ने 1 दिसंबर को डिफॉल्ट जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट के इस फैसले को एनआईए ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।