मच्छरों से फैलने वाले जीका वायरस की रोकथाम का टीका अब जल्द ही उपलब्ध हो सकेगा। कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने फिर से जीका वायरस के टीके को लेकर काम शुरू कर दिया है। कंपनी इस टीके का मनुष्यों पर दूसरे चरण का चिकित्सकीय परीक्षण शुरू करने जा रही है।
अमर उजाला से चर्चा में स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जीका वायरस संक्रमण की जांच सुविधा कम होने के चलते इस वायरस की पहचान करने में बहुत दिक्कत आती है। इसलिए इस वायरस से संक्रमित लोगों को डेंगू और वायरल बुखार मानकर छोड़ दिया जाता है। क्योंकि इस बीमारी के लक्षण काफी हद तक उसी के समान होते हैं। आज जीका वायरस के मामलों की पहचान में सबसे बड़ी दिक्कत व्यापक पैमाने पर जांच उपकरणों की कमी है। दूसरी तरफ जीका वायरस की जांच प्राइवेट लैब भी बहुत कम करती है। इसलिए अगर कोई मामला संदिग्ध मिलता भी है तो उसकी पुष्टि मुश्किल होती है। हालांकि अब कई प्राइवेट लैब जीका-वायरस को भी अपनी जांच सूची में शामिल करने की तैयारी कर रही हैं। इससे भविष्य में आसानी हो सकेगी।
वैश्विक रिपोर्टों के अनुसार, विभिन्न प्लेटफॉर्म जैसे डीएनए-प्लाज्मिड तकनीक, एमआरएनए, अटैंयूएटेड लाइव वायरस, वायरल वैक्टर वैक्सीन पर जीका वायरस के बहुत से टीके तैयार करने का काम चल रहा है। मच्छर से होने वाले फ्लेवीवायरस जीका वायरस को पहली बार 1947 में युगांडा के जीका जंगल में रीसस बंदर के खून से अलग किया गया था। इसके बाद अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका में खास तौर पर इस वायरस का संक्रमण फैला है। 2016 की शुरुआत में यह तेजी से फैला। उस समय इसके पुष्ट और संदिग्ध मामले 10 लाख से ऊपर पहुंच गए थे। मगर 2017 से मामले घट रहे हैं।
भारत कभी इन देशों में शामिल नहीं रहा है, जहां इस वायरस से महामारी फैली हो। मगर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया अध्ययन जून में 'फ्रंटियर इन माइक्रोबायोलॉजी' में प्रकाशित हुआ था। इसमें कहा गया कि यह वायरस दबे पांव देश भर में फैल रहा है। 2021 केरल, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में इस वायरस से संक्रमित लोग मिले थे। इसके अलावा 2021 में ही झारखंड, राजस्थान, पंजाब, तेलंगाना और दिल्ली में भी इसकी मौजूदगी की पुष्टि हुई थी। आईसीएमआर के विशेषज्ञों इस वायरस के तेजी से फैलने के संकेत दे रहे हैं।
बारिश का मौसम आते ही मच्छर और उनसे काटने वाली बीमारियों का प्रकोप बढ़ जाता है। मच्छरों से फैलने वाली एक खतरनाक बीमारी है जीका वायरस। इसका इंफेक्शन मच्छर के काटने से फैलता है। ये बीमारी एडीज मच्छर से फैलती है, जो दिन के समय ज्यादा एक्टिव रहते हैं। जीका वायरस से होने वाला संक्रमण इतना खतरनाक होता है कि कई बार इसमें अस्पताल में भर्ती होना पड़ जाता है। अगर किसी गर्भवती महिला को ये संक्रमण हो जाए, तो इससे गर्भ में पल रहे शिशु के दिमाग पर भी बुरा असर पड़ता है।
यह वायरस बहुत तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचता है। इसलिए संक्रमित व्यक्ति को लक्षण दिखने के बाद करीब तीन सप्ताह तक लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। असुरक्षित शारीरिक संबंध बनाने से बचें, इसके अलावा जिस इलाके में ये वायरस फैल रहा है वहां जाने से बचें। घरों में मच्छरों से बचाव रखें, इंसेक्ट रेप्लेंट का इस्तेमाल करें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, खिड़की और दरवाजों पर जाली का इस्तेमाल करें, बिस्तर में मच्छरदानी लगाकर रखें।