नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के प्रदर्शन के चार महीने पूरे होने पर संयुक्त किसान मोर्चा ने शुक्रवार को भारत बंद का आह्वान किया। ये बंद सुबह छह बजे से शाम छह बजे तक चला। मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र समेत दक्षिण भारत में भी इस बंद का मामूली असर देखने को मिला। गुजरात में भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक गुजरात पुलिस किसान नेताओं को छोड़ नहीं देती तब तक हम सड़के नहीं खालेंगे।
मध्यप्रदेश में किसान आंदोलन का असर शहरों की अपेक्षा गांवों में ज्यादा देखने को मिला। इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में इसका कोई भी असर देखने को नहीं मिला है। लेकिन गांवों में किसानों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। वहीं, छत्तीसगढ़ में बंद का असर नहीं देखने को मिला। कोरोना संक्रमण को देखते हुए किसान संगठन पीछे हट गए। राजधानी रायपुर में किसान संगठन ने बंद नहीं बुलाया है। धमतरी, राजनांदगांव समेत कई जिलों में बंद की खबरें नहीं हैं।
भारत बंद के दौरान महाराष्ट्र में किसान संगठनों के साथ कांग्रेस पार्टी के लोग भी मैदान में उतरे। महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले और मुंबई कांग्रेस के अध्यक्ष भाई जगताप सहित अन्य नेताओं ने सुबह 11 बजे मंत्रालय के सामने धरना और प्रदर्शन दिया। इसके अलावा राज्य के सभी जिला और तहसील क्षेत्रों में भी किसानों और कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। बंद पर महाराष्ट्र कांग्रेस ने कहा कि, भाजपा अपने घमंड के चलते इन विषयों की ओर ध्यान नहीं दे रहे है। वहीं, पेट्रोल-डीजल और एलपीजी गैस पर केंद्र सरकार द्वारा भारी मात्रा में टैक्स लगाकर एक तरह से आम जनता की जेब पैर डाका ही डाल रही है। आज महंगाई से लोगों का जीना दुश्वार हो गया है। सरकार के मजदूर कानून में बदलाव से मजदूरों का भी बुरा हाल हो गया है।
गुजरात में भी संयुक्त किसान मोर्चा की तरफ से भारत बंद का आह्वान किया गया है, ऐसे में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह को अहमदाबाद में प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया। दिल्ली के गाजीपुर बॉर्डर पर बैठे किसान नेताओं ने यह निर्णय लिया है कि जब तक उनके नेता को रिहा नहीं किया जाता, तब तक वो सड़कों पर ही जमे रहेंगे। भाकियू उत्तर प्रदेश अध्यक्ष राजवीर सिंह जादौन ने बताया, 'ये तानाशाही है, हम अपनी बात नहीं रख सकते, प्रेस वार्ता नहीं रख सकते। हमारे नेता को जिस तरह हिरासत में लिया है यह गलत है। जब तक उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा, तब तक सड़कों से नहीं उठेंगे।'
भाकियू मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि अहमदाबाद स्थित एक रेस्टोरेंट में प्रेस वार्ता के दौरान पुलिस ने हिरासत में ले लिया। गाड़ियों में बिठा कर उन्हें ले जाया गया है यह दिखाया है कि ये गुजरात मॉडल है। गाजीपुर बॉर्डर मोर्चा ने तय किया है कि शाम छह बजे के बाद भी सड़कें नहीं खोलेंगे।