पिछले दिनों देशभर में दलितों द्वारा चलाया गया भारत बंद आंदोलन भले ही थमा हुआ दिख रहा हो लेकिन मध्यप्रदेश इसकी आग में आज भी सुलग रहा है। 2 अप्रैल को दलितों के भारत बंद के दौरान ग्वालियर, भिंड और मुरैना में हुई हिंसक घटनाओं में 8 मौतों के बाद प्रशासन 10 अप्रैल को सवर्णों के आंदोलन को बड़ी चुनौती मान रहा है। इस चुनौती को देखते हुए प्रशासन ने ग्वालियर, भिंड और मुरैना में प्रशासन ने स्कूल कॉलेजों को 10 अप्रैल को बंद करने का एलान किया है।
जबकि भोपाल में किसी भी हिंसा से निपटने के लिए प्रशासन पूरी तरह से तैयार हैं। भोपाल के कमिश्नर अजातशत्रु श्रीवास्तव ने कहा है कि भोपाल में धारा 144 लागू की जाएगी जबकि स्कूल खुले रहेंगे। किसी भी हिंसा से निपटने के लिए 6000 पुलिस फोर्स लगाई गई है। वहीं सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जा रही है।
यही नहीं भिंड में सोमवार रात से पूरे दिन कर्फ्यू लगाने का फैसला लिया है। जबकि राज्य सरकार ने ग्वालियर में इंटरनेट सेवाएं रविवार रात 11 बजे से मंगलवार रात 10 बजे तक बंद रखने का आदेश दिया है। जबकि मुरैना में भी सोमवार दोपहर 2 बजे से इंटरनेट सेवा बंद रहेगी। इस बीच, कई संगठनों का कहना है कि अब बंद का कोई औचित्य नहीं है।
बता दें कि 2 अप्रैल को सबसे अधिक हिंसा मध्यप्रदेश में हुई थी जिसके बाद वहां काफी धड़पकड़ भी हुई है। अब कल यानी 10 अप्रैल को एक भार फिर भारत बंद का एलान किया गया है जिसे देखते हुए लाइसेंसी हथियार धारक लोग अपने हथियार के साथ थाने पहुंच गए हैं। हथियार जमा करने वालों की रविवार को लंबी लाइन लगी रही। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार थाटीपुर थाने में लोगों को बंदूक जमा कराने के लिए 6 से 7 घंटे तक का इंतजार करना पड़ा।