आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि संस्कार भारती को समाज की संस्कृति को विकृत करने को अपनाए जा रहे हथकंडों से निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए। आरएसएस से संबद्ध संस्कार भारती की ओर से आयोजित अखिल भारतीय कलासाधक संगम के दौरान भरत मुनि सम्मान समारोह में बोलते हुए भागवत ने कहा, आजादी के बाद अब भारत अपने आत्म सम्मान की खोज की ओर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, कभी-कभी कला का इस्तेमाल बुरी संस्कृति फैलाने के लिए किया जाता है। संस्कार भारती को इसके लिए भी तैयार रहना होगा। संस्कार भारती को अपनी संस्कृति के विकास के लिए कलाकारों के संग्रह की आवश्यकता होगी। कलाकारों का संग्रह ऐसा होना चाहिए जो विश्व संस्कृति का मार्गदर्शन कर सके। देश उठेगा और अपनी पहचान बनाएगा।
भारत का आत्मसम्मान लौटने में लग गए 75 साल
भागवत ने कहा कि अयोध्या में नवनिर्मित मंदिर में राम लला के आगमन के साथ भारत का आत्मसम्मान लौट आया है। भारत को आजादी हासिल हुए 75 साल बीत हो चुके हैं, इसके बावजूद बाद भी भारत की भारतीयता के उदय होने में इतना समय लग गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारों ने हर पहलू में भारतीयता की उपेक्षा की है।